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कानबाई माता के पर्व में उमड़ा आस्था का सैलाब, ढोल-ताशों के साथ हुआ भव्य विसर्जन

मनीष विद्यार्थी सेंधवा मध्यप्रदेश 

महाराष्ट्रीयन समाज ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा, रातभर भजन-कीर्तन के बाद नदी तट पर माता को दी विदाई

KPN24.com सेंधवा 17 अगस्त 2026

महाराष्ट्रीयन समाज के प्रमुख धार्मिक पर्व कानबाई माता उत्सव को सेंधवा नगर में पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। रविवार शाम घर-घर माता की स्थापना के साथ शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन सोमवार को ढोल-ताशों की गूंज के बीच भव्य विसर्जन के साथ संपन्न हुआ। विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरा वातावरण माता के जयकारों से गूंज उठा।

परंपरा के अनुसार रविवार शाम महाराष्ट्रीयन समाज के दर्जनों परिवारों में सप्त्या पूजन के बाद कानबाई माता की विधिवत स्थापना की गई। इसके बाद रातभर जागरण, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ माता की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
ढोल-ताशों के साथ निकली विसर्जन यात्रा
सोमवार सुबह माता की प्रतिमाओं को श्रद्धापूर्वक सजाकर ढोल-ताशों के साथ विसर्जन के लिए ले जाया गया। जुलूस में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रास्तेभर माता के जयकारों और पारंपरिक संगीत से माहौल भक्तिमय बना रहा। नदी तट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद माता को भावपूर्ण विदाई दी गई।
दूर-दराज से जुटता है परिवार और कुटुंब
कानबाई माता का यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का अवसर ही नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तों को जोड़ने वाली परंपरा भी है। इस पर्व में शामिल होने के लिए महाराष्ट्रीयन समाज के परिवारों के रिश्तेदार दूर-दराज के क्षेत्रों से सेंधवा पहुंचते हैं। कई परिवार माता के प्रति अपनी श्रद्धा और मन्नत के चलते लगातार तीन या पांच वर्षों तक स्थापना करने का संकल्प भी लेते हैं।
नगर पालिका ने संभाली विसर्जन व्यवस्था
माता के सुरक्षित और व्यवस्थित विसर्जन के लिए नगर पालिका द्वारा निवाली रोड स्थित छोटे घटिया पटिया पर विशेष व्यवस्था की गई थी। पर्व के शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित समापन को लेकर सेंधवा शहर पुलिस और नगर पालिका की टीम पूरे समय मुस्तैद रही। नगर पालिका सीएमओ मधु चौधरी एवं इंजीनियर सचिन अलोन भी विसर्जन जुलूस के साथ मौजूद रहे।
आस्था, परंपरा और पारिवारिक एकजुटता के रंग में रंगा कानबाई माता का यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए भावनाओं से भरा रहा। माता की विदाई के साथ आयोजन का समापन हुआ, लेकिन भक्तों के मन में अगले वर्ष फिर से माता के आगमन की प्रतीक्षा और श्रद्धा की भावना बनी रही।

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Author: Kpn 24

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