
कोलवाशरियों के लिंकेज, रिजेक्ट कोल के इस्तेमाल और प्रदूषण पर उठते गंभीर सवाल; CBI जांच और SIT गठन की मांग पर अड़ी भारतीय जनाधिकार पार्टी
KPN24.com कोरबा 28 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक गढ़ कोरबा में कोलवाशरियों के संचालन, क्षमता विस्तार और रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों से हो रहे जल-वायु प्रदूषण को लेकर बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है। ACB ग्रुप और एसईसीएल (SECL) से जुड़े कथित गड़बड़झालों, कोयला आवंटन और पर्यावरणीय अनुपालना की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी ने 30 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय, कोरबा के समक्ष एक दिवसीय उग्र धरना-आंदोलन का ऐलान किया है।
फोरेंसिक ऑडिट और CBI जांच की सीधी मांग
भारतीय जनाधिकार पार्टी के जिला संयोजक दिनेश यादव, जिलाध्यक्ष सूरजभान दास बैरागी और महिला जिलाध्यक्ष श्रीमती रेखा भारतीय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सीधे तौर पर ACB ग्रुप की कोयला आवक से लेकर रिजेक्ट कोल के अंतिम उपयोग तक की संपूर्ण फोरेंसिक जांच (Forensic Audit) कराने की मांग रखी है।
संगठन के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि पूर्व में दीपका और SECL मुख्यालय बिलासपुर में प्रस्तुत जनहित शिकायतों पर अब तक कोई ठोस व समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई है। इसी निष्क्रियता के खिलाफ अब कलेक्टर कार्यालय कोरबा के सामने सीधा मोर्चा खोला जा रहा है।
“जांच एजेंसियों से मांग है कि ACB ग्रुप और SECL के कोयला लिंकेज की स्वतंत्र जांच के लिए CBI की सीधी दखल हो अथवा एक उच्चस्तरीय संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।”
इन मुख्य बिंदुओं पर प्रशासन और ACB ग्रुप को घेरा:
- कोयला लिंकेज व गुणवत्ता का सत्यापन: उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के आवंटन, Fuel Supply Agreement (FSA), वास्तविक उठाव और उसके अंतिम उपयोग के बीच बड़े अंतर का आरोप लगाया गया है। रिकॉर्ड्स और जमीनी स्टॉक का मिलान कर दूध का दूध और पानी का पानी करने की मांग की गई है।
- रिजेक्ट कोल व मिडलिंग्स का सच: पावर प्लांटों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले रिजेक्ट कोल और मिडलिंग्स की वास्तविक मात्रा, तापीय क्षमता (Calorific Value), ईंधन मिश्रण और उत्पादन लागत का वैज्ञानिक परीक्षण व सत्यापन कराने की मांग उठाई गई है।
- क्षमता विस्तार व पर्यावरणीय अनदेखी: कोलवाशरियों की स्वीकृत क्षमता से अधिक संचालन, क्षमता विस्तार की आड़ में हो रहे नियम-विरुद्ध कार्यों और इलाके में फैलते भयंकर प्रदूषण पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई है।
पारदर्शिता के लिए बड़े आंदोलन की चेतावनी
नेताओं ने जोर देकर कहा कि कोरबा और आसपास के क्षेत्रों में कोयला खनन, परिवहन और ताप विद्युत उत्पादन से जुड़े हर पहलू में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। 30 अक्टूबर को होने वाले इस धरने के माध्यम से शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम दिया जाएगा कि यदि जल्द ही स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच और CBI/SIT स्तर की कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो यह जन-आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।










