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सात फेरों के बाद टूटा भरोसा, नेशनल लोक अदालत ने फिर जोड़ा रिश्ता

लोक अदालत बनी टूटते दांपत्य को बचाने का सशक्त मंच

मनीष विद्यार्थी मंडलेश्वर | 
KPN24 :- जिला न्यायालय मंडलेश्वर में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत न केवल विवादों के समाधान का माध्यम बनी, बल्कि बिखरते परिवारों को फिर से जोड़ने का सशक्त उदाहरण भी पेश किया। इस अवसर पर सात फेरों के बाद टूट चुके एक दांपत्य जीवन को लोक अदालत की समझाइश और सकारात्मक प्रयासों से नई शुरुआत मिली।

नेशनल लोक अदालत में प्रधान जिला न्यायाधीश अखिलेश जोशी एवं कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पंकज सिंह माहेश्वरी की संवेदनशील समझाइश तथा अधिवक्ता नागेश केवट के सार्थक प्रयासों से एक वर्ष से अलग रह रहे पति-पत्नी ने पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। पति-पत्नी ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर दांपत्य जीवन में दोबारा प्रवेश किया। इस भावुक क्षण पर न्यायाधीशों द्वारा दोनों को शुभकामनाएं देते हुए फलदार पौधा भेंट किया गया।

प्रकरण हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत कुटुंब न्यायालय में लंबित था। आपसी अविश्वास और मतभेदों के कारण पति-पत्नी के संबंधों में आई दरार तलाक तक पहुंच गई थी, जिससे पत्नी अपने दो बच्चों के साथ अलग रहने लगी थी। लोक अदालत की पहल ने एक टूटते परिवार को नया जीवन दिया।

नेशनल लोक अदालत में 1016 प्रकरणों का निराकरण, करोड़ों का सेटलमेंट

नेशनल लोक अदालत में कुल 1016 लंबित प्रकरणों का आपसी राजीनामे से निराकरण किया गया, जिसमें ₹8 करोड़ 21 लाख 22 हजार 366 रुपये का सेटलमेंट हुआ। इससे 2298 लोग लाभांवित हुए।

इसके अलावा नगर पालिका, बैंक एवं बीएसएनएल के प्री-लिटिगेशन मामलों में 2037 प्रकरणों का निराकरण कर ₹2 करोड़ 49 लाख 42 हजार 614 रुपये की वसूली की गई, जिससे 2396 व्यक्ति लाभांवित हुए।

न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय पंकज सिंह माहेश्वरी, जिला न्यायाधीश सुजीत कुमार सिंह, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री प्रीति जैन, न्यायाधीश मोहित बड़के, सुश्री शिवांगनी भट्ट, अध्यक्ष जिला अभिभाषक संघ विजय जोशी, सहित अनेक न्यायाधीश, अधिवक्ता, बैंक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, न्यायालयीन कर्मचारी एवं पैरालीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित रहे।

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Author: Kpn 24

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