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धान खरीदी से वंचित किसानों का फूटा आक्रोश, कृषक चेतना मंच ने दी चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

जांजगीर-चांपा, 16 फरवरी 2026 KPN24.com

जिले में धान खरीदी से वंचित किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। आज ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर भवन, जांजगीर में कृषक चेतना मंच के नेतृत्व में जिले की 15 सहकारी समितियों के किसानों की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में ऐसे किसान शामिल हुए जिनका एक दाना धान भी समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा गया है।
बैठक में किसानों ने बताया कि अधिकांश प्रभावित किसान सहकारी समितियों के ऋणी हैं और कई वारिसान (उत्तराधिकार) किसान हैं, जिनका पंजीयन अथवा तकनीकी कारणों से धान खरीदी नहीं हो पाई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है।
“धान ही जीवन का आधार”
किसानों ने एक स्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ का किसान पूरी तरह धान की फसल पर निर्भर है। दैनिक जरूरतों से लेकर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, बीमारी का इलाज, सामाजिक व धार्मिक आयोजन—सब कुछ धान की बिक्री से मिलने वाली राशि पर आधारित होता है।
ऐसे में धान का नहीं बिक पाना उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर रहा है।
बैठक में उपस्थित किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे हताश, निराश और मानसिक रूप से विचलित हैं। कई किसानों के सामने कर्ज चुकाने का भी संकट खड़ा हो गया है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
कृषक चेतना मंच ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से तत्काल हस्तक्षेप कर वंचित किसानों का दाना-दाना धान खरीदने की मांग की है। मंच ने याद दिलाया कि सरकार ने “दाना-दाना धान खरीदी” का वादा किया था, ऐसे में किसानों के साथ किसी प्रकार की वादाखिलाफी स्वीकार्य नहीं होगी।
मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि 9 फरवरी 2026 को भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपा गया था, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
डिप्टी कलेक्टर ने दिया आश्वासन
किसानों द्वारा सौंपा गया ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर शशि कुमार चौधरी ने प्राप्त किया। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों और समस्याओं को शासन स्तर तक गंभीरता से पहुंचाया जाएगा।
डिप्टी कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन किसानों की समस्याओं को समझता है और नियमानुसार समाधान की दिशा में प्रयास करेगा। उन्होंने किसानों से संयम बनाए रखने की अपील भी की।
आंदोलन की चेतावनी
कृषक चेतना मंच के सहसंयोजक संदीप तिवारी और संयोजक ठाकुर राजशेखर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो किसानों के हित में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रशासन की भूमिका पर टिकी नजर
अब किसानों की नजर शासन-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो जांजगीर-चांपा जिले में किसान आंदोलन की आहट और तेज हो सकती है।

 

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Author: Kpn 24

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