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मेडिकल कॉलेज निर्माण पर नया विवाद: “जमीन हमने दी, अब रास्ता भी हम ही मांग रहे” — 150 किसान प्रभावित

KPN24:- जांजगीर-चांपा जिले के कुटरा गांव में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज निर्माण अब किसानों के लिए नई मुसीबत बनता दिख रहा है। जिस जमीन को विकास के नाम पर सौंपा गया, उसी के बीच से गुजरने वाला पारंपरिक खेत मार्ग बंद किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। किसानों का कहना है कि “जिसने जमीन दी, वही आज अपने खेत तक पहुंचने के लिए रास्ता मांग रहा है।”

ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य के चलते खेतों तक जाने वाला वर्षों पुराना मार्ग अवरुद्ध हो रहा है, जिससे करीब 150 किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। खेत तक पहुंच बाधित होने का मतलब है—बोनी, कटाई और फसल ढुलाई पर सीधा असर, और यही उनकी आजीविका की रीढ़ है।
सोमवार को 60-70 किसान कलेक्टोरेट पहुंचे और जनदर्शन में अपनी पीड़ा रखी। किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास विरोधी नहीं हैं। अतिक्रमण हटाने से लेकर प्रशासनिक सहयोग तक, गांव ने हर बार साथ दिया है। लेकिन अब निजी जमीन तक पहुंच का रास्ता बंद कर देना अन्यायपूर्ण है।
“कुटरा को अतीत में धकेलने जैसा कदम” — राघवेन्द्र पाण्डेय
कुटरा मालगुजार से जुड़े राघवेन्द्र पाण्डेय ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए कहा कि भूमि पूजन से जुड़े विवाद पहले ही स्थानीय स्तर पर सुलझा लिए गए थे। इसके बावजूद ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज करना चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, “गांव पहले भी कठिन दौर से गुजर चुका है। कई परिवार कानूनी और सामाजिक संघर्षों से निकले हैं। ऐसे में संवाद के बजाय एकतरफा निर्णय लेना कुटरा को फिर से अतीत में धकेलने जैसा कदम है।”
किसानों की मांग: चारों ओर 20 फीट चौड़ी सड़क सुनिश्चित हो
जनदर्शन में किसानों ने मांग रखी कि मेडिकल कॉलेज निर्माण के दौरान खेतों तक आवागमन बाधित न हो और चारों ओर कम से कम 20 फीट चौड़ी सड़क की व्यवस्था की जाए।
किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एडीएम ने निर्देश दिया कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से चर्चा कर निर्माण कार्य दो दिन के लिए रोका जाए। इसके बाद एसडीएम ने तहसीलदार को तत्काल मौके पर भेजा।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पूर्व दिशा का आवागमन पूरी तरह बंद हो सकता है, जबकि पश्चिम दिशा में आंशिक रूप से प्रभावित होने की आशंका है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचनामा, वैकल्पिक मार्ग पर जोर
जांच दल में वर्षा अग्रवाल (नायब तहसीलदार), आरआई और पटवारी मौजूद रहे। ग्राम संरक्षक राघवेन्द्र पाण्डेय, सरपंच, पंचगण और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार किया गया।
अब गांव के किसान और जनप्रतिनिधि एक सुर में कह रहे हैं कि विकास जरूरी है, लेकिन खेती की जीवनरेखा को काटकर नहीं। वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पारंपरिक मार्ग को यथावत रखा जाए या फिर तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक मार्ग की स्थायी व्यवस्था की जाए।
कुटरा में उठी यह आवाज केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उस सवाल की है—क्या विकास की राह किसानों के खेतों से होकर गुजरेगी या उनके हक़ को साथ लेकर आगे बढ़ेगी?

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Author: Kpn 24

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