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पैरा पुटू उत्पादन की आधुनिक तकनीक सीख रहीं कृषि सखी और पशु सखी दीदियाँ

13 दिवसीय कृषि उद्यमी प्रशिक्षण में पराली से अतिरिक्त आय का गुर, ग्रामीण महिलाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर

KPN24.com जांजगीर-चांपा 03 जूलाई 2026

ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि अवशेषों को आय का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) जांजगीर में 13 दिवसीय कृषि उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की कृषि सखी एवं पशु सखी दीदियाँ उत्साहपूर्वक पैरा पुटू (ऑयस्टर मशरूम) उत्पादन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक सीख रही हैं।

संस्थान के निदेशक ललित कुमार हेमरम के मार्गदर्शन में मास्टर ट्रेनर दीनदयाल यादव प्रतिभागियों को पराली से मशरूम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। वहीं बैंकिंग एवं स्वरोजगार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी अरुण पाण्डेय एवं उत्तम राठौर द्वारा प्रोजेक्टर के माध्यम से दी जा रही है।
पराली नहीं जलेगी, बनेगी कमाई का जरिया
प्रशिक्षण में बताया गया कि धान, गेहूँ, जौ एवं मक्का की पराली जैसे कृषि अवशेषों से ऑयस्टर (डिंगरी) मशरूम का उत्पादन बेहद आसान और लाभकारी है। इससे पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी, पर्यावरण संरक्षण होगा और किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा।
प्रतिभागियों को पराली का चयन, गर्म पानी से उपचार, स्पॉन (बीज) की लेयरिंग, बैग तैयार करने की विधि, तापमान एवं नमी का संतुलन, मशरूम की देखभाल और सही समय पर तुड़ाई तक की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।
10 किलो पराली से 10 किलो तक मशरूम उत्पादन
मास्टर ट्रेनर दीनदयाल यादव ने बताया कि यदि वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन किया जाए तो 10 किलोग्राम सूखी पराली से लगभग 6 से 10 किलोग्राम ताजा ऑयस्टर मशरूम प्राप्त किया जा सकता है। एक बैग से सामान्यतः 3 से 4 बार उत्पादन लिया जा सकता है तथा उपयोग के बाद बचा अवशेष उत्कृष्ट जैविक खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट बनाने में उपयोगी होता है।
ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार का नया अवसर
प्रशिक्षण में जिले के अकलतरा, बलौदा, बम्हनीडीह एवं सक्ती विकासखंडों की बड़ी संख्या में कृषि सखी एवं पशु सखी दीदियाँ शामिल होकर मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक सीख रही हैं। यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि की दिशा में नई पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।

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Author: Kpn 24

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