
Kpn24.com बिलासपुर 24 सितंबर 2026
एसीबी समूह की कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और रेलवे साइडिंग से जुड़े मामलों की वर्ष 1999 से अब तक जांच की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने गुरुवार को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने धरना दिया।
प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई जांच के साथ उच्चस्तरीय विशेष जांच दल, बहु-विभागीय जांच, वित्तीय एवं डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट तथा भौतिक सत्यापन की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
पार्टी नेताओं ने दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चकाबुरा, रतिजा, रेंकी और बिंझारी सहित संबंधित कोयला वाशरियों एवं ताप विद्युत परियोजनाओं में कोयले के वास्तविक उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन और उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों के प्रमुख आरोप और मांगें—
वाशरियों की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन का वर्षवार मिलान कराया जाए।
कच्चे कोयले, धुले कोयले, रिजेक्ट कोल, गाद और अन्य उप-उत्पादों का वैज्ञानिक हिसाब सत्यापित किया जाए।
कोयले के स्रोत से लेकर वाशरी, परिवहन, प्राप्तकर्ता और अंतिम उपयोग तक पूरी श्रृंखला की जांच हो।
दीपका क्षेत्र में लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में वायु प्रदूषण, धूल, राख, शोर, भूजल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए।
पेसा क्षेत्र में ग्रामसभा की सहमति, भूमि उपयोग और वन एवं सामुदायिक संसाधनों से जुड़े अभिलेखों की जांच की जाए।
वर्ष 2015 से अब तक औद्योगिक डीजल, एचएसडी और बायोडीजल की खरीद, भंडारण एवं उपयोग का मिलान कराया जाए।
एसीबी समूह को मिले कर छूट और अन्य सरकारी प्रोत्साहनों की जांच की जाए।
श्रमिकों के वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण और ठेका श्रम संबंधी अनुपालन की जांच हो।
तौल कांटा सर्वर, जीपीएस, फास्टैग, सीसीटीवी, आरएफआईडी, ईआरपी/एसएपी, ईंधन, रेलवे और वित्तीय डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं।
पार्टी के श्री दुबे ने आरोप लगाया कि कोयला लेवी और अवैध कोयला कारोबार से जुड़े मामलों में कार्रवाई के बावजूद संबंधित औद्योगिक गतिविधियों की व्यापक जांच नहीं हुई है। उन्होंने एसईसीएल की खदानों में वर्ष 2018 से अब तक सीएसआर, खरीदी-बिक्री, ओबी कार्यों के भुगतान और अन्य कार्यों की भी जांच की मांग की।
वहीं संजय रत्नाकर ने पेसा प्रावधानों के तहत ग्रामसभा और जंगल की जमीन से जुड़े अभिलेखों की जांच की मांग की। कमल किशोर साव ने सरकारी कर छूट एवं औद्योगिक प्रोत्साहनों की जांच, जबकि शैलेंद्र कुमार गोपाल ने श्रमिकों के अधिकार और सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच की मांग रखी।
विन्देश सिंह राठौर ने कहा कि जांच केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वर्षों से निगरानी करने वाले एसईसीएल, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका और निरीक्षण अभिलेखों की भी जांच होनी चाहिए।
आंदोलन को मिला समर्थन
धरने को इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनीश सेठ ने समर्थन देते हुए एसईसीएल के भू-विस्थापित किसानों को उचित मुआवजा और रोजगार का मुद्दा उठाया। आम आदमी पार्टी के सचिव डॉ. सुनील राज किरण ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए एसईसीएल में कथित अनियमितताओं, सीएसआर कार्यों और विकास कार्यों से जुड़े अभिलेखों एवं बिलों की जांच की मांग की।
आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी
पार्टी ने कहा कि यदि सीबीआई, एसआईटी अथवा राज्य सरकार द्वारा जांच दल गठित कर कार्रवाई नहीं की गई तो 2 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय कोरबा के सामने 24 घंटे का उपवास/न्याय आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद 22 अक्टूबर से एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के सामने अनिश्चितकालीन धरना और 1 नवंबर को केंद्रीय कोयला मंत्री के आवास, हैदराबाद में धरना देने की चेतावनी दी गई है।
धरने में भारतीय जनाधिकार पार्टी के पदाधिकारी, युवा मोर्चा, छात्र संघ, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, चिकित्सा प्रकोष्ठ सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।










