
kpn24.com बिलासपुर, 21 अक्टूबर 2026
देशभर में चर्चा के केंद्र में रहे समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर छत्तीसगढ़ में अब जमीन पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के निर्देशानुसार, आगामी 28 अक्टूबर को बिलासपुर में एक महत्वपूर्ण संभाग स्तरीय समूह चर्चा एवं परामर्श बैठक का आयोजन किया जा रहा है।
यह बैठक दोपहर 12:30 बजे से देवकी नंदन दीक्षित सभागृह (लाल बहादुर शास्त्री स्कूल, बिलासपुर) में संपन्न होगी, जिसमें राज्य के भविष्य के कानूनों की दिशा तय करने वाले कई अहम सुझावों पर मंथन होगा।
किन 8 जिलों के प्रतिनिधियों की होगी सहभागिता?
इस महा-बैठक में बिलासपुर संभाग के कुल आठ जिलों के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। इनमें शामिल हैं:
- बिलासपुर
- मुंगेली
- गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM)
- जांजगीर-चांपा
- कोरबा
- रायगढ़
- सक्ती
- सारंगढ़-बिलाईगढ़
कौन-कौन होगा शामिल?
इस खुली चर्चा में समाज के हर वर्ग की आवाज को प्रमुखता से शामिल करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों को आमंत्रित किया गया है:
- राजनीतिक दलों, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रमुख
- शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित नागरिक
- निगम, मंडल एवं आयोगों के प्रतिनिधि
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में तैयार हो रहा है प्रारूप
राज्य शासन ने गत 25 जून 2026 को जारी अधिसूचना के तहत सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
इस प्रतिष्ठित समिति में प्रशासनिक और कानूनी क्षेत्र के दिग्गज शामिल हैं:
- श्री शत्रुघ्न सिंह (सेवानिवृत्त IAS अधिकारी)
- श्री एम.के. राउत (सेवानिवृत्त IAS अधिकारी)
- श्री मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता)
- श्रीमती ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्य)
किन मुद्दों पर होगी मुख्य चर्चा?
समिति छत्तीसगढ़ के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित कानूनी और सामाजिक विषयों पर विधिक स्थिति का गहराई से अध्ययन कर रही है:
- विवाह और तलाक के नियम
- भरण-पोषण (Alimony) के प्रावधान
- उत्तराधिकार (Inheritance) के अधिकार
- दत्तक ग्रहण (Adoption) से जुड़े कानून
इसके साथ ही, समिति देश के अन्य राज्यों में लागू यूसीसी व्यवस्थाओं का भी बारीकी से अध्ययन कर रही है। बिलासपुर संभाग की इस बैठक से मिलने वाले सुझावों और अन्य हितधारकों के इनपुट्स को मिलाकर ही समिति अंततः समान नागरिक संहिता का अंतिम प्रारूप तैयार कर राज्य शासन को सौंपेगी और जरूरी विधायी अनुशंसाएं देगी।










