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भारतीय संस्कृति की आत्मा है संस्कृत, इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना होगा : मुख्यमंत्री श्री साय

KPN24:- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत भाषा में निहित है, जो हमें विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। संस्कृत व्याकरण, दर्शन और विज्ञान की नींव है, जो तार्किक चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रोत्साहित करती है। वे आज राजधानी रायपुर के संजय नगर स्थित सरयूपारीण ब्राह्मण सभा भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी प्राचीन काल में थी। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा और साहित्य हमारी विरासत का आधार हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन सबकी जिम्मेदारी है। संस्कृत में वेद, उपनिषद और पुराण जैसे ग्रंथों का अमूल्य भंडार है, जो दर्शन, विज्ञान और जीवन-मूल्यों की शिक्षा देते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आयुर्वेद, गणित और ज्योतिष जैसे विषय आज भी शोध के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जिनकी जड़ें वेदों में निहित हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संस्कृत साहित्य से जुड़कर इसकी ज्ञानधारा को नई पीढ़ी तक पहुँचाएं।

मुख्यमंत्री ने तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को और अधिक आकर्षक एवं प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्वानों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में ठोस पहल की जा सकती है। उन्होंने सम्मेलन को भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का एक महान प्रयास बताया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सरयूपारीण ब्राह्मण सभा, छत्तीसगढ़ के प्रचार पत्रक का विमोचन किया तथा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। सम्मानित व्यक्तियों में गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्लेषा शुक्ला, उत्कृष्ट तैराक अनन्त द्विवेदी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला शामिल थे।

कार्यक्रम में संस्कृत भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास में अनेक प्रमाण हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि संस्कृत कभी जनभाषा के रूप में प्रचलित थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा का संस्कृत से गहरा संबंध बताते हुए कहा कि पाणिनि व्याकरण की कई धातुएँ आज भी छत्तीसगढ़ी में प्रयोग होती हैं।

सम्मेलन को दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला और अखिल भारतीय संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीराम महादेव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, अजय तिवारी, बद्रीप्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संस्कृत शिक्षक, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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Author: Kpn 24

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