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बेसहारा गौ-वंश की तस्करी का खेल जारी: प्रशासन मौन, गौरक्षक गायब — आखिर कब थमेगा यह अमानवीय व्यापार?

KPN24:- छत्तीसगढ़ जैसे धार्मिक और संस्कारों से जुड़े राज्य में, जहाँ गौ-वंश को “माता” का दर्जा दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं बेजुबान गाय-बैलों की बूचड़खाने तक तस्करी का घिनौना खेल खुलेआम जारी है। सवाल उठता है — जब सरकार गौमाता की रक्षा की दुहाई दे रही है, तो आखिर यह अमानवीय व्यापार किसकी सरपरस्ती में चल रहा है?

पाली थाना क्षेत्र इन दिनों मवेशी तस्करों का सुरक्षित अड्डा बन चुका है। बिचौलियों के जरिए रात के अंधेरे में ट्रकों और कंटेनरों में बेसहारा गौ-वंश को भरकर दूसरे राज्यों में वध के लिए भेजा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, गांव-गांव में घूमने वाली गायों और बैलों को 500 रुपए प्रति जानवर के हिसाब से खरीदा जाता है। फिर इन्हें भारी वाहनों में ठूंसकर बांग्लादेश, मिजोरम, असम और मेघालय के बूचड़खानों तक पहुंचाया जाता है, जहाँ उनका निर्दयतापूर्वक वध किया जाता है।

बीते शनिवार की रात पाली क्षेत्र के सोनारडीह गांव में यूपी पासिंग कंटेनर में दर्जनों गाय-बैल ठूंसकर भरे गए। जब कुछ जागरूक ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने तत्काल स्थानीय गौरक्षकों और पुलिस प्रशासन को सूचित किया। लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि न तो गौरक्षकों ने कोई हरकत की और न ही पुलिस मौके पर पहुंची।

स्थानीय ग्रामीणों ने मवेशियों से भरे वाहन को रोकने की कोशिश की, परंतु पुलिस की ढिलाई और तस्करों की तैयारी के चलते वाहन रात के अंधेरे में कटघोरा की ओर निकल गया। बाद में थाना प्रभारी ने नाकेबंदी करवाई, लेकिन तब तक तस्कर अन्य रास्तों से फरार हो गए।

सूत्र बताते हैं कि यह तस्करी कोई अचानक की घटना नहीं है, बल्कि सुनियोजित रैकेट है, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी भी मिलीभगत कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि मासिक वसूली के बदले पुलिस आंखें मूंद लेती है, और इसी कारण पाली क्षेत्र में गौ-तस्करी का यह काला कारोबार फल-फूल रहा है।

सोचनीय है कि जिस प्रदेश में ‘गोधन न्याय योजना’ जैसी योजनाएं गौ-संरक्षण के नाम पर चलाई गईं और वर्तमान सरकार गौ-वंश की रक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं उसी प्रदेश से बेजुबान गौमाता को वध के लिए दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है।

यह न केवल मानवता पर कलंक है, बल्कि शासन-प्रशासन की नाकामी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है —
क्या सरकार और पुलिस तब जागेगी जब आखिरी गाय भी बूचड़खाने में कट जाएगी?

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Author: Kpn 24

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