"हर खबर, आपकी नज़र"

kpn 24

जल संचय के सरकारी प्रयासों का दावा, लेकिन नहीं दिख रहा परिणाम

मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर

KPN24:- हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने देशभर के राज्यों और जिलों की सूची जारी की। जिसमें मध्यप्रदेश देश में चौथे नबर पर तो जिला खंडवा देश में पहले नंबर पर आया है। इससे सीधा सवाल जहन में आता है कि हम फिसड्डी क्यों।

बता दें कि हमारे जिले में भी नगर निगम से लेकर जिला पंचायत और मनरेगा से लेकर तमाम योजनाओं और विभागों के सामुहिक जतन कई सालों से किए जा रहे है लेकिन प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। जबकि हमारे जिले का भू-जल स्तर एक हजार फीट के करीब खिसक गया है।
उल्लेखनीय है कि खंडवा को देश में अव्वल होने का तमगा महज बीते एक साल में जल संरक्षण के लिए किए गए निर्माण कार्यो के दम पर मिला है और इसका भौतिक सत्यापन होना अभी बाकी है। लेकिन हमारे यहा जिलेभर में भूमि से जल का दोहन तो बेतहाशा और बेरोक-टोक किया जा रहा है। लेकिन भू-जल संरक्षण की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। हालांकि हर साल पहाड़ों पर गड्ढा कर बारिश का पानी सहेजना, बोरी बंधान, तालाबों का गहरीकरण, नदी-कुओं की सफाई जैसे काम तो करने का दावा तमाम प्रशासनिक विभाग करते रहे है और इस बार भी जल गंगा संवर्धन के सरकारी आयोजन हुए लेकिन फिर भी हम अब तक पानी को सहेजने में सफल नहीं हो पा रहे है।
बिना वाटर हार्वेस्टिंग के नहीं मिलता अपु्रवल
जब भी किसी कॉलोनी या मकान का नक्शा नगर निगम के टाउन एंड कंट्री प्लॉनिंग से पास कराना हो तो इसके लिए एक निर्धारित शुल्क जमा कर यह दर्शाना होता है कि हमारी कॉलोनी या घर में हम वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर बरसात का पानी सहेजकर जमीन में छोड़ेंगे, लेकिन ये महज एक सरकारी प्रक्रिया होकर औपचारिकता भर साबित हो रही है। क्योंकि किसी भी कॉलोनी में इसका पालन पूरी ईमानदारी से नहीं हो रहा है और नगर निगम भी इसको लेकर सख्त नहीं है।
तालाबों का गहरीकरण और बोरी बंधान में लापरवाही
इसी तरह जिलेभर में पारंपरिक जल स्त्रोतों को जीवित करना। जिसमें तालाबों का गहरी करण, सेफ्टीवॉल बनाना, कुंए-बावडिय़ों और हेंडपंप को रिर्चाज करने सहित अन्य तमाम वे प्रयास शामिल है जिनसे बरसात में व्यर्थ बह जाने वाले जल को किसी भी माध्यम से सहेज कर या तो उपयोग किया जा सकें या भूमि में वापस छोड़ा जा सकें। ऐसे जतन करने का दावा सभी सरकारी विभाग करते रहे है लेकिन यदी इस पर काम ईमानदारी से हुआ होता तो हमारा भी नाम इस सूची में शामिल होता। हालांकि बीते 3 महीने से लगातार जल गंगा संवर्धन अभियान से बरसात के जल को सहेजने के लिए अभियान चलाया गया है, अब इस पर कितने सार्थक परिणाम आते है यह तो बारिश के बाद आने वाले समय में ही पता चल पाएगा लेकिन फिलहाल तो लगातार घटता जिले का जलस्तर चिंता का विषय है और हमें पड़ोसी जिले से कुछ सीखने की जरुरत है।
बोरवेल पर लगाना होगा प्रतिबंध
पहले हम पानी के लिए सामुहिक और पारंपरिक जल स्त्रोतों जैसे कुंआ, तालाब, बावड़ी और हेंडपप पर निर्भर होते थे लेकिन बदलते परिदृश्य में अब हर घर के आंगन में बोरवेल होने लगे है। इससे भूमि से बेतहाशा जल को दोहन हो रहा है और हर गली-मोहल्ले में बने सीसी रोड के कारण पानी बहकर निकल जाता है। इससे भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इससे बचाव के लिए बोरवेल कराने को प्रतिबंधित करना होगा और वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सख्ती से हर कॉलोनी और हर घर में लागू करना होगा, तभी शायद हमारे जिले का नाम कभी जल शक्ति मंत्रालय की सूची में शामिल हो सकें।

Kpn 24
Author: Kpn 24

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More