
KPN24:- किसी भी प्रकार का नशा हानी कारक होता है नशें से कहीं जिंदगी खत्म हो गई कहीं परिवार के चिराग इसकी चपेट में आने से बुझ गए, नशा से दूरी बनाने में “अपनों से अपनी बात” शीर्षक से एक सामाजिक अपील जारी कर युवाओं से नशा त्यागने का आह्वान किया गया है। इस प्रेरणादायक संदेश में युवाओं से आग्रह किया गया है कि वे सनातन संस्कृति को अपनाकर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करें।
संदेश में कहा गया है कि नशा करने वाला व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार का भी सबसे बड़ा शत्रु होता है, और वह अपने हाथों से अपने भविष्य को बर्बाद करता है। नशा केवल एक शारीरिक आदत नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक पतन की शुरुआत है।
इस संदेश में तीन महान विभूतियों के शिक्षाओं से प्रेरणा लेने की बात कही गई है:
1. युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य – जिनकी 3200 पुस्तकों में जीवन निर्माण के तेजस्वी विचार हैं, जो देशभर के 2400 गायत्री शक्तिपीठों में उपलब्ध हैं।
2. विपश्यना आचार्य सत्यनारायण गोयनका – जो भगवान बुद्ध की ध्यान पद्धति “विपश्यना” के माध्यम से नशा मुक्ति और आत्मशुद्धि की राह दिखाते हैं।
3. ए. नागराज जी – जिनका “मध्यस्थ दर्शन” जीवन विद्या के माध्यम से आत्म-परिवर्तन और संतुलित जीवन की शिक्षा देता है।
संदेश में यह भी कहा गया है कि आज पूरी दुनिया में सनातन संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, और जो युवा इस पथ पर चलेंगे, वे हर क्षेत्र में सफल होंगे। यह संदेश एक सामाजिक चेतना अभियान के रूप में युवाओं को जागरूक करने की कोशिश है, ताकि वे नशा जैसे विनाशकारी मार्ग को छोड़कर आध्यात्मिक और नैतिक जीवन की ओर अग्रसर हों।










