
KPN24 :- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जांजगीर-चांपा पुलिस ने एक अनोखी पहल करते हुए भाई-बहन के प्रेम को जीवन सुरक्षा से जोड़ा। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप के मार्गदर्शन में जिलेभर में “ऑपरेशन उपहार” के तहत 1124 दोपहिया चालकों को निःशुल्क हेलमेट वितरित किए गए।
इस अभिनव पहल को नाम दिया गया – ‘एक हेलमेट भाई के नाम’, जिसके माध्यम से न केवल लोगों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया गया, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव के साथ जीवन की सुरक्षा का संदेश भी दिया गया।
हेलमेट: सिर्फ एक उपकरण नहीं, जीवन की ढाल है
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री उदयन बेहार के नेतृत्व में जिले के समस्त थाना/चौकी क्षेत्रों में सड़क पर चलने वाले दोपहिया चालकों को हेलमेट वितरण किया गया।
पुलिस विभाग ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में 70% मौतें दोपहिया वाहन चालकों की होती हैं, जिनमें से लगभग 35-40% मौतें हेलमेट के अभाव में होती हैं। इन्हीं आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए इस अभियान की शुरुआत की गई, जिससे लोगों में जागरूकता फैले और दुर्घटनाओं में जानमाल की हानि को रोका जा सके।
जन-जागरूकता और सामाजिक सहभागिता से चला ऑपरेशन
“ऑपरेशन उपहार” सिर्फ हेलमेट बांटने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान है। इसके तहत आम नागरिकों से आह्वान किया गया है कि वे जन्मदिन, विवाह, वर्षगांठ या अन्य सामाजिक अवसरों पर एक-दूसरे को हेलमेट उपहार में दें, ताकि हेलमेट पहनने की आदत एक संस्कार बन सके।
इस अभियान में चांपा पेट्रोल पंप संघ, विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक और औद्योगिक समूहों ने भी सहयोग किया और पुलिस को हेलमेट प्रदान किए, जिसे ज़रूरतमंद दोपहिया चालकों में वितरित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना
हेलमेट पहनने की आदत को प्रोत्साहित करना
मृत्यु दर में कमी लाना
यातायात नियमों के पालन को बढ़ावा देना
नाबालिगों को वाहन न देना और
मोबाइल उपयोग से बचाव को लेकर जागरूक करना
जांजगीर-चांपा पुलिस की अपील:
दोपहिया वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनें
वाहन के समस्त दस्तावेज अद्यतन रखें
नशे की हालत में वाहन न चलाएं
सीट बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपायों का पालन करें
नो पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करने से बचें
जिला पुलिस का यह प्रयास न केवल कानून के पालन की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह आम जनता को यह समझाने का संदेश भी देता है कि ‘जीवन की कीमत किसी जुर्माने से नहीं, जिम्मेदारी से समझी जाती है।’










