
KPN24:- प्रदेश सरकार जहाँ पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चला रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ अधिकारी ही इन प्रयासों को धक्का पहुँचाने में लगे हैं। सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड के अंतर्गत भुतहा नर्सरी में बिना अनुमति हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नर्सरी में उद्यान अधीक्षक की मनमानी के चलते दर्जनों हरे पेड़ काटे जा चुके हैं। इस लापरवाही ने क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार हर साल लाखों पौधे लगवाकर हरियाली बढ़ाने का अभियान चला रही है, तब विभागीय अधिकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
वन विभाग से नहीं ली गई अनुमति
मामले की जानकारी के अनुसार, नर्सरी परिसर में पेड़ों की कटाई या नीलामी से पहले वन विभाग से मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कराना अनिवार्य होता है। रिपोर्ट में पेड़ों की लंबाई, मोटाई और प्रजाति के आधार पर कीमत तय की जाती है।
लेकिन भुतहा नर्सरी के उद्यान अधीक्षक ने न तो विभाग से अनुमति ली, न ही किसी प्रकार का पत्राचार किया।
वन विभाग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि “सरकारी संस्थान अपने परिसर में पेड़ काट सकता है, लेकिन नीलामी से पहले विभागीय अनुमति और मूल्यांकन रिपोर्ट अनिवार्य है। भुतहा नर्सरी के मामले में ऐसा कोई प्रस्ताव हमारे पास नहीं आया है।”
पेड़ कटाई पर नहीं लग रही लगाम
भुतहा नर्सरी में पेड़ों की कटाई का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वन विभाग की कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित दिखाई दे रही है। लगातार हरे पेड़ों के गिरने से न केवल हरियाली घट रही है, बल्कि यह प्रदेश की पर्यावरणीय नीतियों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बिना अनुमति पेड़ काटने के इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसी मनमानी पर रोक नहीं लगाई गई, तो पर्यावरण संरक्षण की सरकारी योजनाएँ केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाएँगी।










