
KPN24:- जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा में श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण मानव जीवन को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। यह केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को दिव्यता प्रदान करने वाला आध्यात्मिक सूत्र है। बिर्रा ग्राम में कर्ष परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर व्यासपीठ से प्रवचन देते हुए प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य श्री राजेन्द्र महाराज ने कहा कि “भागवत कथा मृत्यु को भी मंगलमय बनाती है”।
आचार्य श्री ने कहा कि भागवत भगवान के अवतारों का जीवंत इतिहास है। यह मनुष्य को उसके भावी जन्म की तैयारी इसी जीवन में करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव जी महाराज का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षित को जब श्राप मिला कि सात दिन बाद तक्षक नाग उन्हें डसेगा, तब उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सत्संग और भागवत श्रवण में समर्पित कर दिया। शुकदेव जी ने उन्हें बताया कि “दो घड़ी का सत्संग भी मनुष्य के सद्गति का कारण बन जाता है”।
आचार्य श्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में निहित भक्ति, ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के हृदय को निर्मल करते हैं। यह कथा निराकार ब्रह्म को साकार रूप में अनुभव करने का माध्यम है। वैदिक और पौराणिक काल से कथा की यह परंपरा सनातन धर्म की मूल आत्मा रही है।
कथा में आचार्य श्री ने देवहूति संवाद प्रसंग एवं ध्रुव चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता सुनीति ने अपने पाँच वर्षीय पुत्र ध्रुव के हृदय में भक्ति और अध्यात्म के बीज बोए। यही कारण है कि भगवान ने उनके अटूट संकल्प और भक्ति से प्रसन्न होकर ध्रुव को ध्रुव लोक प्रदान किया, जो आज ध्रुव तारा के नाम से प्रसिद्ध है।
आचार्य श्री ने कहा — “भगवान सदैव अपने भक्तों के वशीभूत रहते हैं। दृढ़ संकल्प और भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है। माता ही संतान की प्रथम गुरु होती है, वही उसके जीवन की दिशा तय करती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण में केवल भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र का ही नहीं, बल्कि उनके भक्तों की भी महिमा का विस्तार किया गया है, इसलिए इसे “श्रीमद् भागवत महापुराण” कहा गया है, न कि केवल “श्रीकृष्ण पुराण”।
कथा पंडाल में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर रहे हैं। आयोजक कर्ष परिवार ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।
द्वितीय दिवस की कथा में मुख्य यजमान के रूप में अनंदराम कर्ष, छतबाई कर्ष, रजनी–राजकमल कर्ष, मंजू–सुरेश कुमार कर्ष, ममता कर्ष, डिम्पल कर्ष, सुमीत कर्ष सहित कर्ष परिवार की महिलाओं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के अंत में भारत माता एवं छत्तीसगढ़ महतारी की मंगलमय आरती की गई।










