
मनीष विद्यार्थी खरगोन
KPN24:- शहर के विभिन्न वार्डों में नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों के बीच बीटीआई रोड स्थित वार्ड क्रमांक-2 में सीसी रोड निर्माण कार्य विवादों में घिर गया है। पुराने पोस्ट ऑफिस के पीछे बन रही इस सड़क को लेकर जहां स्थानीय रहवासी नाराजगी जता रहे हैं, वहीं वार्ड पार्षद ने भी नगर पालिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिणामस्वरूप निर्माण कार्य फिलहाल अधूरा छोड़ दिया गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों की मांग के बाद सड़क निर्माण की स्वीकृति तो मिली, लेकिन काम शुरू होते ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि तकनीकी मानकों को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में निर्माण किया जा रहा है, जिससे सड़क की उम्र बेहद कम हो सकती है।
बिना खुदाई के किया जा रहा निर्माण
रहवासी जितेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि सीसी रोड निर्माण से पहले पुरानी सड़क की उचित खुदाई और मजबूत बेस तैयार किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उबड़-खाबड़ पुरानी सड़क पर ही सीमेंट-गिट्टी की परत बिछाकर निर्माण किया जा रहा है, जो कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त हो सकती है।
मिट्टी के ढेर पर डाली जा रही कंक्रीट
एक अन्य रहवासी सलामत शेख ने आरोप लगाया कि कच्चे रास्ते और मिट्टी के ढेर पर ही सीमेंट कंक्रीट बिछाई जा रही है। ऐसे में वर्षों बाद बनने वाली यह सड़क कुछ ही महीनों में उखड़ने का खतरा है।
पार्षद को नहीं दिया गया एस्टीमेट?
वार्ड क्रमांक-2 की पार्षद अरुणा उपाध्याय ने नगर पालिका के इंजीनियरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे स्वयं इस वार्ड की पार्षद हैं, इसके बावजूद उन्हें अपने ही वार्ड में हो रहे निर्माण कार्यों का एस्टीमेट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इंजीनियर मनीष महाजन और इंजीनियर शिवानी से कई बार एस्टीमेट मांगा गया, लेकिन अब तक जानकारी नहीं दी गई, जो संदेह के घेरे में है।
नगर पालिका अध्यक्ष का बयान
इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष छाया जोशी ने कहा कि वार्ड क्रमांक-2 में चल रहे निर्माण कार्य और पार्षद-इंजीनियर के बीच एस्टीमेट को लेकर क्या स्थिति है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। संबंधित इंजीनियर ही इस विषय में स्पष्ट कर सकते हैं।
सीएमओ ने आरोपों को बताया निराधार
नगर पालिका के सीएमओ कमला कोल ने पार्षद के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वार्ड क्रमांक-2 की पार्षद विकास कार्यों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एस्टीमेट नहीं देने का आरोप पूरी तरह निराधार है और वे स्वयं पार्षद को एस्टीमेट उपलब्ध करा चुके हैं। बार-बार हस्तक्षेप के कारण ही निर्माण कार्य बाधित हुआ है।
इंजीनियर और ठेकेदार का पक्ष नहीं मिल सका
इस पूरे मामले में इंजीनियर मनीष महाजन और निर्माण एजेंसी के ठेकेदार बाबर मलिक से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों ने कॉल रिसीव नहीं किए।










