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सेमीपाली में सजा बसंत-फागुन का रंगमंच, शब्दों की बयार में झूम उठी काव्य संध्या

KPN24:- बसंत की मादक बयार और फाल्गुन की रंगीन छटा के बीच सेमीपाली में साहित्य का एक भव्य और यादगार आयोजन देखने को मिला। उद्गार साहित्य समिति द्वारा सेमीपाली स्थित राधेश्याम कुमार साहू के निज निवास पर बसंत एवं फागुन विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जहां शब्दों ने ऋतुराज का स्वागत किया और भावनाओं ने रंगों की तरह वातावरण को सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के संरक्षक वरिष्ठ कवि एम. आर. राव ने की। विशेष अतिथि के रूप में बाल्को से पधारे मुकुटधर साहित्य समिति, कोरबा के सचिव डॉ. के. के. चन्द्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। माँ शारदे की वंदना के साथ काव्य गोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
कवि जीतेन्द्र कुमार वर्मा ‘खैरझिटिया’ ने “दे अइसन वरदान मां शारदे” शीर्षक से सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भक्तिमय आभा से आलोकित कर दिया। इसके पश्चात आयोजक राधेश्याम साहू ने सभी कवियों का गुलाब भेंटकर आत्मीय स्वागत किया।
ग़ज़ल, गीत और नवगीत से सजी शाम
गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक और नवगीत की विविध विधाओं में अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से श्रोताओं को बांधे रखा।
मनीष मुसाफिर ने ग़ज़ल की पंक्ति “आसमां हो या फिर हो जमी राधिके” से प्रेम का रंग घोला।
राधेश्याम साहू ने मुक्तक में “अब तुम्हें हम नहीं बुलाएंगे” कहकर भावनाओं की गहराई को स्वर दिया।
डॉ. कृष्णकुमार चन्द्रा ने “ऐसे बरसेंगे हम, भींग जाओगे तुम” जैसी पंक्तियों से तालियां बटोरीं।
जीतेन्द्र वर्मा ‘खैरझिटिया’ ने “फागुन आगे जाग रे संगी” सुनाकर फाल्गुनी उमंग जगा दी।
फिरोज़ा खान ने ग़ज़ल और कविता दोनों में अपनी अभिव्यक्ति दी।
कविता जैन ने ग़ज़ल और मुक्तक की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
कोरल वर्मा ने नवगीत और मुक्तक से नई चेतना का संचार किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में एम. आर. राव ने नवगीत “इस बार बसंत आया नहीं, मंगवाया गया है” सुनाकर समकालीन व्यंजना का सशक्त संदेश दिया।
नवल कुमार जोशी ने “ये जो पत्नी है…” शीर्षक हास्य-व्यंग्य से माहौल में ठहाके बिखेरे, वहीं शिशिर कुमार तिवारी ने होली पर हास्य कविता से रंग जमा दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन कविता जैन ने किया, जिन्होंने अपनी फाल्गुनी पंक्तियों के माध्यम से एक-एक कर कवियों को मंच पर आमंत्रित किया। अंत में आयोजक राधेश्याम साहू ने आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों और श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।
परिवारजनों की आत्मीय उपस्थिति में संपन्न यह काव्य गोष्ठी बसंत और फागुन की सजीव अनुभूति बन गई। शब्दों के रंग और भावनाओं की बयार ने न केवल वातावरण को उल्लासमय बनाया, बल्कि साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा और नई दिशा भी प्रदान की।

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Author: Kpn 24

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