
KPN24.com रायपुर 25 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ की धरती ने आज इतिहास रच दिया। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में देश के पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य और गौरवशाली शुभारंभ हुआ। यह आयोजन सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभाओं की ताकत, संस्कृति और आत्मविश्वास का राष्ट्रीय मंच बन गया है।
इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आयोजन की आधिकारिक शुरुआत करते हुए बड़ा संदेश दिया—
“राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है।”
तीन संभाग, एक लक्ष्य — खेलों का महाकुंभ
25 मार्च से 3 अप्रैल तक चलने वाले इस मेगा इवेंट का आयोजन रायपुर, बस्तर और सरगुजा में किया जा रहा है।
देशभर के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से करीब 2500 खिलाड़ी 9 खेल विधाओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का दम दिखा रहे हैं।
इस मौके पर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की और ओलंपिक पदक विजेता साइखोम मीराबाई चानू की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा और बढ़ा दी।
“डबल इंजन” से खेलों को रफ्तार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों का माहौल तेजी से बदल रहा है।
‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ के तहत 100 करोड़ रुपए का प्रावधान
रायपुर और बिलासपुर में रेजिडेंशियल अकादमियां
जशपुर, रायगढ़ और रायपुर में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माणाधीन
खिलाड़ियों के लिए इनाम भी दमदार:
ओलंपिक चयन: ₹21 लाख
स्वर्ण: ₹3 करोड़
रजत: ₹2 करोड़
कांस्य: ₹1 करोड़
जनजातीय ताकत और बदलाव की कहानी
मुख्यमंत्री ने खास तौर पर बताया कि बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में लाखों लोगों की भागीदारी यह साबित करती है कि जनजातीय समाज में खेलों के प्रति जबरदस्त जुनून है।
यहां तक कि आत्मसमर्पित नक्सली भी ‘नुआबाट’ (नई राह) के जरिए मुख्यधारा में लौटकर खेलों से जुड़ रहे हैं—यह बदलाव की बड़ी मिसाल है।
“छत्तीसगढ़ से शुरू होना ऐतिहासिक” — मांडविया
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा:
“खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना ऐतिहासिक है, यह आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय आंदोलन बनेगा।”
उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ अभियानों को खेल क्रांति का आधार बताया।संस्कृति, शौर्य और गौरव का संगम
कार्यक्रम में जनजातीय नायकों जैसे वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर और गेंद सिंह के योगदान को याद किया गया।
नवा रायपुर में बने म्यूजियम और स्टेडियम के नामकरण के जरिए राज्य अपनी विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ रहा है।
बड़ा संदेश :- यह आयोजन सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है—अब प्रतिभा शहरों तक सीमित नहीं, जंगलों और पहाड़ों से निकलकर देश का भविष्य गढ़ रही है।










