
KPN24.com रायपुर, 30 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अभयारण्य स्थित ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर से कुल 34 काले हिरण (ब्लैकबक) को वैज्ञानिक पद्धति से दो चरणों में सफलतापूर्वक उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इन हिरणों को सुरक्षित तरीके से जंगल में मुक्त किया गया, जहां वे अब स्वच्छंद रूप से विचरण कर रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार इस वर्ष 60 ब्लैकबक के पुनर्स्थापन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत चरणबद्ध तरीके से हिरणों को उनके प्राकृतिक पर्यावरण में वापस बसाया जा रहा है।
वैज्ञानिक तकनीक से किया गया स्थानांतरण
पूरी पुनर्स्थापन प्रक्रिया अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और वन्यजीव प्रबंधन के मानकों का पालन करते हुए संपन्न की गई। इसके चलते बिना किसी व्यवधान के हिरणों को सुरक्षित रूप से वन क्षेत्र में छोड़ा गया। मुक्त किए गए हिरण रामपुर ग्रासलैंड क्षेत्र में पहले से मौजूद काले हिरणों के समूह से जा मिले हैं।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस नए समूह के जुड़ने से क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और आने वाले समय में काले हिरणों की संख्या में भी वृद्धि होगी।
विलुप्ति के कगार से वापसी की कहानी
एक समय ऐसा था जब काले हिरण छत्तीसगढ़ की धरती से लगभग विलुप्त हो चुके थे। लेकिन अब वन विभाग के संरक्षण प्रयासों से यह दुर्लभ वन्यजीव फिर से अपने प्राकृतिक आवास में तेज रफ्तार से कुलांचें भरते नजर आएंगे, जो राज्य के वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
अधिकारियों के मार्गदर्शन में चला अभियान
अभियान का संचालन प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे के मार्गदर्शन, मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) सतोविशा समझदार के नेतृत्व तथा वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के सक्रिय प्रयासों से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस दौरान अधीक्षक बारनवापारा कृषाणु चंद्राकर, परिक्षेत्र अधिकारी सुश्री कविता ठाकुर, सूर्यप्रकाश जाधव, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी गीतेश बंजारे, फील्ड बायोलॉजिस्ट सौरव मेहरा, पशु चिकित्सक जयकिशोर जड़िया सहित अभयारण्य का पूरा स्टाफ मौजूद रहा।
वन विभाग ने बताया कि आने वाले समय में काले हिरणों की नियमित निगरानी और संरक्षण कार्य जारी रहेगा, ताकि यह प्रजाति सुरक्षित और समृद्ध रूप से विकसित हो सके।










