
रेस-वॉक क्या होती है, यह भी नहीं जानती थीं… अब राष्ट्रीय मंच पर चमकी मेघालय की युवा एथलीट
KPN24.com रायपुर 1 अप्रैल 2026
खेलों की दुनिया में कभी-कभी जुनून, मेहनत और आत्मविश्वास मिलकर ऐसा इतिहास लिख देते हैं जिसकी मिसाल लंबे समय तक दी जाती है। मेघालय की राजधानी शिलांग की युवा एथलीट बेथलीन ग्रेस माकरी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।
सिर्फ तीन महीने पहले रेस-वॉक की शुरुआत करने वाली इस खिलाड़ी ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में महिलाओं की रेस-वॉक स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।
दरअसल, पिछले साल 29 दिसंबर को शिलांग स्थित Sports Authority of India (SAI) के स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर में बेथलीन के कोच ने अचानक उनमें रेस-वॉक एथलीट बनने की क्षमता देखी। उस समय खुद बेथलीन को भी इस खेल की तकनीकी बारीकियों की कोई जानकारी नहीं थी।
मिडिल डिस्टेंस रनर से बनी रेस-वॉकर
मेघालय की खासी जनजाति से आने वाली बेथलीन पहले मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस रनिंग में हिस्सा लेती थीं। लेकिन 2026 की शुरुआत में कोच की सलाह पर उन्होंने अपना इवेंट बदलने का बड़ा फैसला लिया।
यह बदलाव आसान नहीं था। रेस-वॉक की तकनीक दौड़ से बिल्कुल अलग होती है, जिसके कारण शुरुआती दिनों में उन्हें काफी शारीरिक दर्द और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। कई रातें बिना नींद के गुजरीं और मन में आत्म-संदेह भी पैदा हुआ।
लेकिन कोच और परिवार के मजबूत समर्थन ने उन्हें टूटने नहीं दिया। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी और परिवार की इकलौती बेटी बेथलीन ने हार मानने के बजाय खुद को पूरी तरह इस नई तकनीक को सीखने में झोंक दिया।
जगदलपुर में चमका संघर्ष का फल
कड़ी मेहनत का नतीजा आखिरकार जगदलपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में सामने आया।
महिलाओं की रेस-वॉक स्पर्धा में बेथलीन ने 1:05:18 का समय निकालकर कांस्य पदक हासिल किया। इस स्पर्धा में झारखंड की नेहा ज़ालक्सो (1:04:02) ने स्वर्ण और ओडिशा की एलीश एक्का (1:04:59) ने रजत पदक जीता।
पदक जीतने के बाद भावुक बेथलीन ने कहा कि शुरुआत के दो हफ्ते उनके लिए बेहद कठिन थे। रेस-वॉक की तकनीक को समझने और शरीर को उसके अनुरूप ढालने में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।
“मेरे कोच और परिवार ने दिया हौसला”
बेथलीन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच और परिवार को देते हुए कहा कि अगर उनका समर्थन न होता तो वह शायद यह मुकाम हासिल नहीं कर पातीं।
उन्होंने कहा कि यह कांस्य पदक उनकी मेहनत, विश्वास और परिवार-कोच के सहयोग का परिणाम है और इससे उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास मिला है।
मेघालय की पहली राष्ट्रीय पदक विजेता रेस-वॉकर
शिलांग कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर की छात्रा बेथलीन को इस बात पर गर्व है कि वह मेघालय की ऐसी पहली रेस-वॉकर हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है।
मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा कि उनके इस पदक से मेघालय के युवा भी रेस-वॉक जैसे खेल को पेशेवर रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।










