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देश-दुनिया में बढ़ रहा मध्यप्रदेश का मान, सांस्कृतिक विरासत को मिली राष्ट्रीय पहचान

मैहर बैंड, अगरिया लोह धातुकर्म और निमाड़ी स्वाद राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल, यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल होने की दावेदारी हुई मजबूत

मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर मध्यप्रदेश 

KPN24.com बुरहानपुर मध्यप्रदेश 02 जुलाई 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश की तीन अनमोल धरोहरों—मैहर बैंड, अगरिया लोह धातुकर्म परंपरा और निमाड़ी पारंपरिक व्यंजन—को भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) सूची में शामिल कर लिया गया है। यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह मान्यता अब इन धरोहरों के यूनेस्को की विश्व अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने की दावेदारी को भी मजबूत करेगी।
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को मिला राष्ट्रीय सम्मान
पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में मिली इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पर्यटन विभाग के सचिव एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि यह सम्मान प्रदेश की जीवंत लोक संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विविधता की राष्ट्रीय स्वीकृति है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2028 तक इन धरोहरों को यूनेस्को की स्थायी सूची में शामिल कराने की दिशा में मजबूत प्रयास किए जाएंगे।
वहीं, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक अभय अरविंद बेडेकर ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाएगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इन धरोहरों के संरक्षण का मार्ग प्रशस्त करेगी।
अगरिया लोह धातुकर्म: सदियों पुरानी वैज्ञानिक परंपरा
अगरिया समुदाय आज भी बिना आधुनिक मशीनों के पारंपरिक भट्टियों, स्थानीय लौह अयस्क और लकड़ी के कोयले से लोहा तैयार करता है। यह केवल धातु निर्माण की तकनीक नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन, पारंपरिक ज्ञान और जनजातीय वैज्ञानिक कौशल का जीवंत उदाहरण है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से संरक्षित यह विरासत अब राष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर चुकी है।
108 वर्षों से भारतीय संगीत का गौरव है मैहर बैंड
वर्ष 1918 में महान संगीताचार्य उस्ताद अलाउद्दीन खाँ द्वारा स्थापित मैहर बैंड भारतीय शास्त्रीय संगीत का विश्व का पहला वाद्यवृंद माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता दुर्लभ वाद्य ‘नलतरंग’ है, जिसका निर्माण स्वयं उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने बंदूक की नालियों से किया था। वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा इसे प्रतिष्ठित शिखर सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। आज भी यह वाद्यवृंद भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा का विश्वभर में प्रतिनिधित्व कर रहा है।
निमाड़ का स्वाद बना सांस्कृतिक पहचान
बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी की पारंपरिक खाद्य संस्कृति भी अब राष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुकी है। दाल-पानी, धुली कढ़ी, पूरण की कचौरी, पारंपरिक कबाब, बिरयानी सहित अनेक निमाड़ी व्यंजन अपनी विशिष्ट स्वाद, पारंपरिक विधि और स्थानीय मसालों के कारण अलग पहचान रखते हैं। ये व्यंजन केवल भोजन नहीं, बल्कि निमाड़ की संस्कृति, आत्मीयता और अतिथि सत्कार की जीवंत परंपरा का प्रतीक हैं।
यूनेस्को की ओर बढ़ते मध्यप्रदेश के मजबूत कदम
राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने के बाद अब मध्यप्रदेश की इन तीनों धरोहरों के यूनेस्को की विश्व अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में स्थान पाने की संभावनाएँ और प्रबल हो गई हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण है, बल्कि विश्व पटल पर “अतुल्य मध्यप्रदेश” की पहचान को भी नई ऊँचाई देने वाली साबित होगी।

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Author: Kpn 24

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