
Kpn24.com रायपुर 08 अक्टूबर 2026
देशभर में बिजली की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी का असर अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया है। हालांकि, अन्य राज्यों के मुकाबले छत्तीसगढ़ में स्थिति अभी काफी हद तक नियंत्रित और बेहतर है, लेकिन उमस भरी गर्मी और कृषि पंपों के भारी संचालन के कारण शाम के पीक आवर्स में विद्युत व्यवस्था पर भारी दबाव बन रहा है।
राज्य में वर्तमान औसत मांग करीब 6,000 मेगावाट पहुंच गई है, जिसकी पूर्ति के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज पूरी ताकत से जुटी हुई है।
क्यों बढ़ी है बिजली की मांग?
- धान की सिंचाई: राज्य में इस समय धान फसल के लिए भारी संख्या में कृषि पंपों का संचालन हो रहा है।
- मौसम का मिजाज: अचानक बदले मौसम और उमस भरी गर्मी के कारण बिजली की खपत में अप्रत्याशित उछाल आया है।
- राष्ट्रीय स्तर पर किल्लत: ‘वन नेशन, वन ग्रिड’ के तहत जुड़े होने के कारण देश के अन्य राज्यों में भी मांग अधिक है, जिससे पावर एक्सचेंज में बिजली की उपलब्धता सीमित हो गई है।
उत्तर प्रदेश से खरीदी गई महंगी बिजली
मांग और आपूर्ति के इस अंतर को पाटने के लिए पावर कंपनी हरसंभव प्रयास कर रही है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीमसिंह कंवर ने बताया कि बीती रात ही प्रदेश की अतिरिक्त आवश्यकता को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश से करीब 200 मेगावाट बिजली 10 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई। इसके बावजूद पावर एक्सचेंज में लिमिटेड स्टॉक होने के कारण अतिरिक्त बिजली जुटाने में कठिनाई आ रही है।
प्रबंध निदेश भीमसिंह कंवर का बड़ा बयान
“वर्तमान परिस्थितियां केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में बिजली की मांग चरम पर है। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता ग्रिड की सुरक्षा, स्थिरता और अनुशासन बनाए रखना है। दिन के समय प्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है, लेकिन पीक आवर्स के दबाव को मैनेज करते हुए सभी उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।”
उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए राहत के प्रयास
वितरण कंपनी स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को हो रही परिचालन संबंधी समस्याओं से पूरी तरह वाकिफ है। ग्रिड की सुरक्षा और संतुलन को ध्यान में रखते हुए तकनीकी और प्रबंधकीय स्तर पर लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है और जल्द ही व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य कर लिया जाएगा।










