
खड़ी फसलों की कटाई टालें, खेतों से पानी निकासी की करें व्यवस्था; तिवड़ा और अलसी की बुवाई कुछ दिन रोकने की अपील
Kpn24.com जांजगीर-चांपा 27 अक्टूबर 2026
जिले में आगामी 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया है। चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए विभाग ने खरीफ फसलों को नुकसान से बचाने, खेतों में जलभराव रोकने और कृषि कार्यों में सावधानी बरतने की अपील की है।
खड़ी फसलों की कटाई फिलहाल टालें
उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि मौसम विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दो दिनों में भारी बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए धान, दलहन और तिलहन की जो फसलें पकने की अवस्था में हैं, उनकी कटाई अगले दो से चार दिनों तक स्थगित रखने की सलाह दी गई है।
जिन किसानों ने फसल की कटाई कर ली है, वे उपज को जल्द से जल्द सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर रखें, ताकि बारिश के कारण फसल भीगने और खराब होने की आशंका कम हो सके। इसके साथ ही खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए नालियों की समुचित व्यवस्था करने को कहा गया है।
तिवड़ा और अलसी की बुवाई कुछ दिन रोकने की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को तिवड़ा और अलसी की बुवाई फिलहाल कुछ दिनों के लिए स्थगित रखने की सलाह दी है। रबी फसलों की बुवाई भी मौसम अनुकूल होने और खेतों में नमी की स्थिति का आकलन करने के बाद ही करने को कहा गया है।
फूलगोभी, ब्रोकली, कुंदरू, पपीता, खीरा और करेला जैसी फसलों की बुवाई भी मौसम की स्थिति सामान्य होने पर करने की सलाह दी गई है। लता वाली सब्जियों को तेज हवाओं से बचाने के लिए उचित सहारा देने तथा खेतों और बगीचों में जलभराव रोकने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
फसलों में कीट और रोगों की निगरानी जरूरी
बारिश के दौरान फसलों में कीट एवं रोग लगने की आशंका को देखते हुए किसानों को नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। यदि फसलों में कीट या रोग के लक्षण दिखाई दें, तो मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही उचित कीटनाशक या कवकनाशक का उपयोग करें।
वहीं, ओलावृष्टि की आशंका होने पर सब्जियों और बागवानी फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए ओलावृष्टि-रोधी जाली का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।
मौसम पूर्वानुमान पर रखें नजर
कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और परिस्थितियों के अनुसार ही कृषि कार्यों की योजना बनाएं। किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी या कृषि संबंधी मार्गदर्शन के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।










