
मनीष विद्यार्थी सेंधवा मध्यप्रदेश
चिकित्सक ने विकसित की अभिनव चिकित्सा तकनीक, बवासीर सहित कई गंभीर रोगों के उपचार में मिलेगी नई उम्मीद
KPN24.com सेंधवा 17 जुलाई 2026
प्रतिभा न बड़े शहरों की मोहताज होती है और न ही करोड़ों रुपये की आधुनिक प्रयोगशालाओं की। इसे मध्यप्रदेश के सेंधवा समीप स्थित ग्राम जुलवानिया के युवा आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. जयपाल यादव ने अपनी मेहनत, लगन और नवाचार से साबित कर दिखाया है। सीमित संसाधनों में वर्षों तक निरंतर अनुसंधान कर उन्होंने एक अभिनव चिकित्सा उपकरण विकसित किया है, जिसे भारत सरकार द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया है।
यह उपलब्धि केवल डॉ. यादव की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की प्रतिभा, नवाचार और आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन गई है। एक ग्रामीण आयुर्वेद चिकित्सक द्वारा चिकित्सा उपकरण के क्षेत्र में पेटेंट हासिल करना इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो गाँव की मिट्टी से भी विश्वस्तरीय नवाचार जन्म ले सकते हैं।
प्रोक्टोलॉजी उपचार के लिए विकसित की अभिनव तकनीक
डॉ. जयपाल यादव द्वारा विकसित यह तकनीक प्रोक्टोलॉजी (गुदा एवं मलाशय रोग) के उपचार में सहायक उपयोग के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें उपचार संबंधी कई प्रक्रियाओं को एकीकृत कर एक ही प्रणाली में समाहित करने का प्रयास किया गया है। इससे भविष्य में मरीजों और चिकित्सकों दोनों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
मरीजों की पीड़ा बनी नवाचार की प्रेरणा
डॉ. जयपाल यादव ने बताया कि इस तकनीक की प्रेरणा उन्हें अपने चिकित्सकीय अनुभव के दौरान मिली। मरीजों की समस्याओं को देखते हुए उन्होंने वर्षों तक अध्ययन, डिज़ाइन विकास, प्रोटोटाइप निर्माण और तकनीकी परीक्षण किए। लगातार प्रयासों के बाद उनके इस नवाचार को भारत सरकार ने पेटेंट प्रदान किया।
15 वर्षों का संघर्ष, पत्नी बनीं सबसे बड़ी ताकत
डॉ. यादव बताते हैं कि जब उन्होंने इस शोध की शुरुआत की, तब उनके पास न आधुनिक प्रयोगशाला थी और न ही किसी प्रकार की बड़ी आर्थिक सहायता। उनके पास केवल मरीजों को बेहतर उपचार देने का संकल्प और पत्नी पार्वती यादव का अटूट सहयोग था।
उन्होंने इस परियोजना पर लगभग 15 वर्षों तक लगातार मेहनत की। पिछले तीन वर्षों से अपना क्लिनिक तक बंद रखा और शोध कार्य में पूरी तरह जुटे रहे। इस दौरान उन्हें इंदौर, भोपाल, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों के कई चक्कर लगाने पड़े। अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और भारत सरकार ने उनके नवाचार को पेटेंट प्रदान किया।
ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा
डॉ. जयपाल यादव का कहना है कि यह पेटेंट केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हर उस ग्रामीण युवा की जीत है जो बड़े सपने देखने और समाज की सेवा करने का साहस रखता है।
जल्द मरीजों तक पहुंचेगी तकनीक
वर्तमान में इस चिकित्सा उपकरण से संबंधित आवश्यक नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसे नाममात्र शुल्क पर मरीजों तक उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बवासीर सहित लगभग आठ गंभीर बीमारियों के उपचार में सहायता मिलने की संभावना है।










