
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ पुस्तक का किया विमोचन | वनकर्मियों का सम्मान | गांवों और विद्यालयों तक पहुंच रहा जागरूकता अभियान
KPN24.com जशपुर 18 अगस्त 2026
जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने की दिशा में जशपुर की अभिनव पहल ‘गजरथ यात्रा’ अब संरक्षण और जनजागरूकता की एक प्रभावी मिसाल बनकर सामने आ रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को अपने गृहग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में जशपुर वनमंडल की जनजागरूकता गतिविधियों पर आधारित पुस्तक ‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ का विमोचन किया।
पुस्तक में मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने, हाथियों के प्राकृतिक आवास एवं संरक्षण तथा प्रभावित क्षेत्रों में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए वन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों और अभिनव गतिविधियों को दस्तावेज के रूप में संकलित किया गया है।
जनसुरक्षा के साथ वन्यजीव संरक्षण सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर वन-संपदा और जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है। ऐसे में मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार, उनके विचरण क्षेत्रों और उनकी गतिविधियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाकर मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने ‘गजरथ यात्रा’ की सराहना करते हुए कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों को जागरूक और सतर्क बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। वन विभाग के साथ ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से मानव और हाथियों के बीच बेहतर एवं सुरक्षित सह-अस्तित्व की राह मजबूत होगी।
गांव-गांव और स्कूलों तक पहुंच रही ‘गजरथ यात्रा’
जशपुर वनमंडल द्वारा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में शुरू हुई ‘गजरथ यात्रा’ अब गांवों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंच रही है।
अभियान के दौरान ग्रामीणों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार, भोजन, आवास और विचरण क्षेत्रों की जानकारी दी जा रही है। लोगों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, उनकी मौजूदगी में अनावश्यक रूप से नजदीक नहीं जाने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इस पहल का एक अहम उद्देश्य हाथियों को लेकर फैली भ्रांतियों और अनावश्यक भय को दूर कर उनके प्रति वैज्ञानिक, संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना भी है।
‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ में दर्ज हुई संरक्षण की कहानी
‘गजरथ यात्रा-भाग 02’ में जशपुर वनमंडल के मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन और हाथी संरक्षण से जुड़े प्रयासों को विस्तार से दर्ज किया गया है। इसमें जनजागरूकता कार्यक्रमों, ग्रामीणों की भागीदारी, विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने तथा हाथियों के साथ सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को प्रमुखता दी गई है।
पुस्तक यह संदेश भी देती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय और आम नागरिकों की जागरूकता एवं सहयोग से ही इसे प्रभावी बनाया जा सकता है।
तकनीक बनी सुरक्षा की साथी, समय पर मिल रही हाथियों की सूचना
हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और प्रभावित क्षेत्रों में समय पर सूचना पहुंचाने के लिए जशपुर वनमंडल आधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रहा है। ‘राज संकेत’ ऐप के माध्यम से हाथियों के विचरण और गतिविधियों की जानकारी मिलने पर संबंधित क्षेत्रों के ग्रामीणों तक मोबाइल संदेश के जरिए सूचना पहुंचाई जा रही है।
समय पर सूचना मिलने से ग्रामीण सतर्क हो रहे हैं और हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बच पा रहे हैं। वन विभाग के मैदानी अमले, त्वरित प्रतिक्रिया दल और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय से जनसुरक्षा और हाथी प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है।
बच्चों को बनाया जा रहा संरक्षण का संदेशवाहक
‘गजरथ यात्रा’ में विद्यालयों और विद्यार्थियों को भी विशेष रूप से जोड़ा गया है। जागरूकता कार्यक्रमों में बच्चों को हाथियों के व्यवहार, जैव विविधता, जंगल और वन्यजीवों के महत्व तथा संरक्षण की जरूरत के बारे में जानकारी दी जा रही है।
वन विभाग का प्रयास है कि नई पीढ़ी में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और वैज्ञानिक सोच विकसित हो। बच्चे स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और समाज तक भी सुरक्षित व्यवहार और संरक्षण का संदेश पहुंचाएं।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले वनकर्मी सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन, जनसुरक्षा और हाथी संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने वनकर्मियों की तत्परता और स्थानीय समुदायों के साथ उनके समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि जंगल और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाला मैदानी अमला मानव-वन्यजीव द्वंद्व को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार सहित वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
जशपुर से निकला बड़ा संदेश
‘गजरथ यात्रा’ अब महज जनजागरूकता अभियान नहीं, बल्कि जनसुरक्षा, तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और वन्यजीव संरक्षण को एक मंच पर जोड़ने की पहल बनती जा रही है। जशपुर की यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि जंगल और इंसान के बीच टकराव को केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि जागरूकता, सतर्कता और आपसी समझ से भी कम किया जा सकता है।










