
Kpn24.com रायपुर 21 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ के सम्मान और भारतीय संस्कृति की मर्यादा को लेकर एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश सोशल मीडिया पर साझा किया है। इंदौर के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माताजी से जुड़े प्रसंग पर हुए विवाद के बाद सीएम साय की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा केंद्र बन गई है।
मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बिना दो टूक संदेश दिया है कि राजनीति या वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मातृशक्ति और माँ का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
”माँ का करे अपमान, वो कुपुत्र कहलाएगा”
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया पर माँ की महिमा, त्याग और वात्सल्य को समर्पित एक वीडियो और अपनी कुछ मार्मिक पंक्तियां साझा की हैं। उन्होंने अपनी कविता के जरिए दो टूक संदेश दिया:
“माँ है ममता, माँ है करुणा, माँ जीवन का आधार है,
माँ के चरणों में समर्पित पूरा ये संसार है।
माँ का करे अपमान वो कुपुत्र ही कहलायेगा,
माँ का करे तिरस्कार वो कहीं ठौर न पायेगा।”
मुख्यमंत्री ने इस पोस्ट के साथ प्रसिद्ध कवि ओम व्यास की माँ पर केंद्रित एक लोकप्रिय काव्य रचना भी साझा की है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में एक स्टैंड-अप कॉमेडियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की थी।
विवाद तब गहराया जब प्रस्तुति के दौरान उस प्रसंग को शामिल किया गया जिसमें पीएम मोदी ने एक सार्वजनिक मंच से भीड़ के बीच बैठी एक बुजुर्ग माताजी के लिए तुरंत कुर्सी मंगवाई थी। भाजपा नेताओं ने इस पर तीखी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के नाम पर हास्य की आड़ में माँ और मातृशक्ति का अनादर किया गया है। चूंकि कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी भी मंच पर मौजूद थे, इसलिए इस पर राजनीतिक सियासत और तेज हो गई है।
राजनीति से ऊपर सांस्कृतिक मर्यादा
इस गरमागरम माहौल के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश सियासी बयानबाजी से हटकर भारतीय संस्कारों और सांस्कृतिक चेतना को केंद्र में रखता है। मुख्यमंत्री के इस कदम से साफ संदेश जाता है कि राजनीतिक वैचारिक लड़ाइयां अपनी जगह हैं, लेकिन भारत की संस्कृति में माँ का स्थान सर्वोच्च है और उनके सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री साय के इस धारदार औरसंवेदनशील रुख ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ के मुखिया अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं के प्रति कितने अडिग और मुखर हैं।










