
मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर।
KPN24:- साइकिल दिवस हर साल 3 जून को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य साइकिल की महत्ता बताने, स्वस्थ जीवन में उसका स्थान, एक सरल, सुलभ, सस्ता, भरोसेमंद, स्वच्छ और पर्यावरण मित्र होन के साथ साईकिल को एक अनुकूल परिवहन साधन माना गया है।
प्रदुषण रहित साईकिल आज पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। पहले कभी दो शहरों के बीच की दूरी को पाटना हो या भारत भ्रमण की यात्रा करना हो, किसी शुभ प्रसंग में जाना हो या समय की बचत करना हो तो सबसे पहले साईकिल की याद आती थी। लेकिन बदले परिदृश्य और आधुनिकता के साथ बढ़ते स्टेटस सिंबल के चलन ने साईकिल को मीलों पीछे छोड़ दिया है। लेकिन आज भी साईकिल जैसी पर्यावरण की सहेली दूसरी नहीं बन सकी।
बता दें कि साईकिल चलाना अब बीते जमाने की बात हो गई लेकिन इसी सोच ने और बढ़ते दो पहिया वाहनों के दबाव ने ग्लोबल वार्मिंग जैसे शब्द को ईजाद किया है। सूरज के बढ़ते तेवर और बदला मौसम का चक्र गर्मी में बरसात, के पीछे भी साईकिल से दूरी ही बड़ा कारण है। कभी सिर्फ दूरी तय करने के लिए ही नहीं बल्कि व्यापार-व्यवसाय के साथ घरेलू काम काज में भी साईकिल का बड़ा रोल हुआ करता था। साईकिल रिक्शा चलाकर परिवार चलाने से लेकर, टिफिन बांटने, सब्जी बेचने, पानी भरने तक के लिए साईकिल का उपयोग होता था। अब केवल साईकिल तभी चलाई जाती है जब डॉक्टर इसकी सलाह देते है।
क्यों मनाया जाता है विश्व साइकिल दिवस
साईकिल की विशिष्टता और उपयोगिता को मान्यता देने के लिए दुनियाभर में 3 जून को विश्व साईकिल दिवस मनाया जाता है। साईकिल एक ऐसा साधन है जिसका उपयोग दो सदियों से किया जाता रहा है। साइकिल चलाने से कार्बन उत्सर्जन कम होता है और यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। जिससे पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के आर्थिक बोझ और बीमारियों से बचाव करते हुए पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इसके लिए कई देश और शहर साइकिल रैली और अन्य साइकिलिंग कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
दिल और घुटनों की डॉक्टर है साईकिल
सेहत के जानकारों की माने तो साईकिल चलाने वालों को अन्य लोगों की तुलना में हार्ट अटैक की संभावना कम होती है और उनकी घुटने भी लंबे समय तक सेहतमंद बने रहते है। इसलिए साईकिल को दिल और घुटनों की डॉक्टर भी कहा जाता है। इन बिमारियों से जुझने वाले लोगों को अक्सर डॉक्टर साईकिलिंग करने की सलाह देते है। शहर के अजय भगत बताते है कि मेरी दिन की शुरुआत साइकिल चलाने से होती है। यह आदत मुझे 1995 से है जब मैं सुभाष स्कूल साइकिल से जाया करता था। तब से साइकिल मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई है। हर सुबह मैं साइकिल से गार्डन जाता हूं फिर कुछ देर वॉक करता हूं और योगा करता हूं। इस दिनचर्या ने मेरे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। मेरी उम्र 48 वर्ष है लेकिन मैं आज भी युवा और ऊर्जावान महसूस करता हूं। साइकिल चलाना न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि मानसिक रुप से भी शांति प्रदान करता है। विश्व साइकिल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि साइकिल न केवल एक साधन है बल्कि यह एक स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी भी है। आइए हम सभी साइकिल को अपने जीवन में अपनाएं और प्रकृति व स्वास्थ्य की ओर एक कदम बढ़ाएं।










