
मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर
KPN24:- प्रदेशभर में बीते करीब दो माह से प्रशासन इस प्रयास में लगा है कि किसान अपनी रबी की फसलों की कटाई के बाद बचे हुए कृषि अवशेष को खेत में जलाने की प्रथा बंद करें। इसको जलाने से होने वाले दुष्परिणामों के लिए गांव-गांव कृषि विभाग की टीमें जाकर चौपाल लगाकर किसानों को समझा भी रही है।
इसकी बावजूद प्रदेश के इंदौर सहित तमाम जिलों में किसानों के खिलाफ दर्जनों एफआईआर भी दर्ज हुई और लाखों रुपए जुर्माना भी वसूला गया। लेकिन लाख समझाईश और कृषि विभाग के तमाम जतन करने के बावजूद जिले में आखिर पहली एफआईआर मोहम्मदपुरा के एक किसान के खिलाफ दर्ज की गई।
उल्लेखनीय है कि मोहम्मदपुरा के किसान विनोदसिंह पिता हरेसिंह के खिलाफ जिले के कृषि विस्तार अधिकारी श्रीराम फत्तु पाटिल ने लालबाग थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया है। लालबाग थाने के एएसआई गोपालसिंह मामले की जांच कर रहे है। बताया जाता है कि नरवाई जलाने से कई तरह की जहरीली गैसों को उत्र्सजन होता है। इससे पर्यावरण को भारी क्षति होने के साथ खेती की भी उर्वरक क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है।
बता दें कि बीते दिनों इंदौर में भी जिला प्रशासन ने खेतों में नरवाई जलाने पर 770 किसानों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इतना ही नहीं उन किसानों से बतौर दंड 17 लाख रुपए की वसूली भी की गई। ऐसा ही मामला जिले में न हो इसलिए जिलेभर के किसानों को सचेत करने के लिए लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विभाग के अफसरों ने चौपाल लगाकर किसानों को समझाईश भी दी और नरवाई या पराली (फसल निकलने के बाद बचे कृषि उत्पाद) को खेतों में लगाने से बचने की हिदायत भी दी थी।
नरवाई जलाने से किसान और पर्यावरण दोनों को नुकसान
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एमएस देवके ने बताया कि जिले में गेहूं, चना व अन्य फसलों की कटाई के बाद पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर पर्यावरण, जन स्वास्थ्य एवं जीव जन्तुओं, पेड़-पौधों की जीवन सुरक्षा के लिहाज से फसल अवशेषों को खेतों में जलाया जाना प्रतिबंधित किया गया है। क्योंकि इससे गन्ना और केला पत्ती के साथ जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। अवशेषों को खेत में ही जलाने से जो जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते है ऐसे घटक आगजनी केे कारण नष्ट हो जाते है। इससे निकलने वाले जहरीले धुंए से वायु मंडल में कार्बन उत्र्सजन बढ़ जाता है। स्टबल बर्निंग या भूसा जलाने की प्रवृति पर रोक लगाने के लिए अब शासन स्तर पर किसानों से दंड वसूलने जैसे कदम उठाए जाएंगे। कृषि अवशेषों को खेतों में ही जलाने से आर्गेनिक कार्बन और केंचूआ नष्ट होता है और जमीन कठोर हो जाती है। कृषि विभाग का ये जतन किसानों को जागरुक करने के लिए किया गया है, क्योंकि इसमें जाने-अनजाने सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का ही होता है।
ऐसे वसूला जा सकता है जुर्माना
कृषि अधिकारी देवके ने बताया कि विभाग द्वारा जारी निर्देशों का उल्लघंन करते पाए जाने पर नोटिफिकेशन प्रावधान के अनुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि किसान से वसूली जाएगी। जिसमें ऐसे कृषक जिनकी भूमि 2 एकड़ से कम हो उनसे दंड ढाई हजार रुपए, जिनकी भूमि 2 से 5 एकड़ के किसान से 5 हजार रुपए और जिनकी भूमि 5 एकड़ से ज्यादा अधिक हो उनसे 15 हजार रुपए तक का दंड वसूला जाएगा।










