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आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त पर लगें गंभीर आरोप, जिसको काउंसिलिंग में भाग लेना था उसी को काउंसिलिंग का प्रभारी बना दिया?

KPN24:-  छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के आदिवासी विभाग राम राज्य चल रहा है जिस कर्मचारी को अधीक्षक श्रेणी से की काउंसलिंग में भाग लेना था उसी को काउंसिलिंग का प्रभारी बना दिया गया वहीं नई प्रभारी सहायक आयुक्त सुश्री स्वपनीता सिंह सहायक संचालक की पदस्थापना के बाद से हो रहे कार्यों में भी भ्रष्टाचार का आरोप  लग रहा  है। कार्य में कही भी पारदर्शिता नजर नहीं आ रही हैं। 
अभी हाल ही में हुए अधीक्षक श्रेणी स की पदस्थापना काउंसलिंग को लेकर भी है सहायक आयुक्त पर नियमों की परवाह किये बगैर जिस अधीक्षक श्रेणी स प्रमोद चन्द्रा की पदोन्नती होनी है उसे से ही काउंसलिंग प्रभारी बनाकर पूरा काउंसलिंग नियम विरूद्ध करवा दिया है जबकि नियमतः जिसकी पदस्थापना होनी है उसे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होना चाहिए लेकिन प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर गलत किया और प्रमोद चन्द्रा ने अपनों को लाभ दिलाने के लिए नियम को अपने हिसाब से परिवर्तित किया है पति पत्नि आधार पर स्थानातरण होता है, पर प्रमोद चन्द्रा ने पति पत्नि कंडिका आधार पर अपनी पदस्थापना तो करवा ली है जबकि दोनों पति पत्नि अलग अलग विभाग से है नियमानुसार दोनों एक ही विभाग के होते तो इसका लाभ मिल सकता था। इसके चलते बहुत से अधीक्षक अब जिले के बाहर पदस्थ होने की कागर पर है। प्रमोद चन्द्रा को पूर्व सहायक आयुक्त ने कार्य में लापरवाही के आधार पर कार्यालय से हटाकर मूल संस्था भेज दिया था पर नये सहायक आयुक्त ने पुनः कार्यालय में अटैच कर अपनी अनुभवहीनता का परिचय दिया है। कुछ दिनों पूर्व संदीप खांडेकर मण्डल निरिक्षक जैजैपुर एसीबी टीम द्वारा. रिश्वत लेते हुए कलेक्टर परिसर में ही पकड़ा गया था उसके बारे में भी समाचार पत्रों में पूर्व में बहुत सी शिकायते छपी थी, सहायक आयुक्त सक्ती ने उस पर कोई कार्यवाही ना करते हुए उसे हमेशा अपने साथ कार्यालय में रखती थी। एसीबी टीम द्वारा रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद ही उसे निलंबित किया अब प्रमोद चन्द्रा के काउंसलिंग प्रक्रिया की जांच होना भी असंभव लग रहा है क्योंकि इतने दिनों की कार्यप्रणाली से स्पष्ट है की वो गलत करने वाले रिश्वत लेने वालों पर मेहरबान रहती है।
सामान खरीदी पर प्रश्न चिन्ह
सहायक आयुक्त द्वारा जो भी विभागीय सामान की खरीदी की जा रही है वो भी चुनिंदा फर्म से किया जा रहा है अन्य फर्म को मौका नहीं दिया जा रहा है। इसकी भी जांच आवश्यक है, इनके कार्यकाल में विभागीय खरीदी किस किस फर्म से हुई है ।
अनावश्यक निर्माण कार्य :
कोरबा की तरह यहां भी डी.एम.एफ. का दंश आदिवासी विकास विभाग को लगा है  पर अनावश्यक निर्माण कार्य पर हो रहे खर्च पर सवाल उठता है।
प्री मै. अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास मालखरौदा साल भर से पो.मै. अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास मालखरौदा के भवन में संचालित है सिर्फ छत से पानी टपकाव के कारण विभाग ने डी. एम. एफ फंड और विभागीय निर्माण फंड से बहुत से निर्माण कार्य किये है परन्तु विकासखण्ड स्तरीय कन्या. छात्रावास जैसे निर्माण कार्य को नहीं करवाना इनकी अनुभवहीनता को दर्शाता है। जिला मुख्यालय स्थित प्री मै. अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास सक्ती जो की 50 सीटर है 02 साल भर से प्री. मै. अनुसूचित जाति बालक छात्रावास सक्ती जो की 20 सीटर है के भवन में सिर्फ छत से पानी टपकाव के कारण संचालित है दैनिक वेतन भोगियों को कार्य से नहीं लिया जाना भी जांच का विषय है। सहायक आयुक्त की कार्यप्रणाली की जांच आवश्यक है। अगर समय रहते उपरोक्त प्रकरणों की जांच नहीं की गई तो आने वाले समय में संदीप खांडेकर जैसे अन्य रिश्वत कांड हो सकता है।
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Author: Kpn 24

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