
मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर
KPN24:- जिला कांग्रेस में फिर हलचल है। आज शहरी और ग्रामीण जिलाध्यक्ष के दावेदारों से मिलकर रिपोर्ट बनाने के लिए केंद्रीय आब्जर्वर चेतन चौहान, प्रदेश प्रभारी डॉ.विजयलक्ष्मी साधौ, जिला प्रभारी ग्यारसी लाल रावत और शेख अलीम साहब फिर एक बार संयुक्त दौरा करने आ रहे है।
फिर एक बार इसलिए कि करीब एक पखवाड़े पहले भी ये टीम बुरहानपुर, नेपानगर और दर्यापुर का दौरा कर कार्यकर्ताओं और दावेदारों से मिलकर जा चुकी है। लेकिन इससे पहले कि इस टीम की रिपोर्ट तैयार होकर पीसीसी चीफ पटवारी को सौंपी जाती, इनकी टीम के पूर्व कप्तान और पर्यवेक्षक कुणाल पाटिल ने यहां से जाते ही भाजपा का दामन थाम लिया। इस मामले में प्रदेश और जिला कांग्रेस की खूब जग हंसाई हो रही है। इसके बाद अब आज पूरी टीम फिर से वहीं होगी बस टीम के कप्तान का जिम्मा पर्यवेक्षक चेतन चौहान को दिया गया है। अब जिला कांग्रेस को इनसे उम्मीद की किरण जागी है।
बता दें कि देश और प्रदेश की तरह ही जिला कांग्रेस भी अपनी मुफलिसी और बदहाली के दौर से गुजर रही है। आलम ये है कि नया कोई कांग्रेस की सदस्यता लेना नहीं चाहता और जो पुराने कार्यकर्ता संगठन को अपने कंधों पर ढो रहे है, वो भी बैक डोर से खिसकने लगे है। बीते दिनों कांगे्रस के सृजन अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष के दावेदारों और कार्यकर्ताओं से मिलकर रिपोर्र्ट पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी को सौंपने वाले पर्यवेक्षक कुणाल पाटिल ने यहां से जाते ही महाराष्ट्र में भाजपा का दामन थाम कर कांग्रेस की खूब किरकिरी की। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रिंकू टांक ने बताया कि अब आज दोपहर 2 बजे गुर्जर भवन में शिकारपुरा थाने के सामने आयोजित एक कार्यक्रम में नई टीम कार्यकर्ताओं और दावेदारों से मिलकर चर्चा करेगी।
पहले अंर्तकलह से निपटना प्राथमिकता
जिला कांग्रेस अपने बूरे दौर से गुजर रही है। इसका कारण अंर्तकलह है। संगठन के निर्देशों की अनसुनी और प्रत्येक पदाधिकारी का मनमाना रवैया संगठन को अनुशासन से कोसों दूर ले जा चुका है। जिसके कारण कोई किसी की सुनने और मानने को तैयार नहीं है। इधर पदाधिकारियों की ये खिंचतान जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोडऩे के लिए काफी है। पीढिय़ों से समर्पित कार्यकर्ताओं की अब भी संगठन में अनदेखी के कारण आज कांग्रेस की वैसी ही दशा है जैसी अपने बुजुर्गों का अपमान कर मनमानी करने वाली नई पीढ़ी के परिवारों की हो रही है। यदी सत्तारुढ़ भाजपा का सशक्त विरोध कर परिर्वतन की बयार बहानी है तो सबको एकजुट होकर संगठन के निर्देशों को बगैर किंतू परंतु के मानना होगा।
जैसा खाया अन्न, वैसा बना मन
एक पुरानी लोकोक्ति है कि जैसा खाएं अन्न, वैसा बनें मन। दरअसल, इसे शाकाहार से जोड़ा गया है कि शाकाहारी भोजन करने से मन शांत और निर्मल होता है जबकि मांसाहारी भोजन से तामसी स्वभाव कोध्र और काम की भावनाएं जाग्रत होती है। लेकिन जिला कांग्रेस में ये लोकोक्ति अभी खूब चर्चाओं में है। कारण यह कि बीते पखवाड़े जो पर्यवेक्षक सृजन अभियान के तहत कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने आए थे, वो यहां से जाते ही उस नैया में एक बड़ा छेद और कर भाजपा की गोद में जा बैठे। दबी जुबान में कई कांग्रेसी कह रहे है कि उन्होंने एक संघ परिवार के स्वयंसेवक के घर भोजन किया और उनका ह्दय परिर्वतन हो गया। जिसके चलते वे यहां से भोजन करते ही भाजपा के प्राथमिक सदस्य बन गए।










