
KPN24:- एमपी अजब-गजब के दिलचस्प मामले पूरे देश को आश्चर्य में डाल देते हैं कि आखिर एमपी में ये सब हो कैसे जाता है ऐसा ही एक मामला फिर मध्यप्रदेश की राजधानी में भोपाल किसानों के कल्याण के नाम पर गठित फर्टिलाइजर डेवलपमेंट फंड (FDF) के दुरुपयोग का बड़ा खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों के हित में खर्च किए जाने वाले लगभग 5.31 करोड़ रुपये में से 4.79 करोड़ रुपए, यानी 90% राशि, राज्य और जिला स्तर पर गाड़ियों के उपयोग में खर्च कर दी गई।
यह रिपोर्ट हाल ही में विधानसभा में पेश की गई, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस विधायक और पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव ने आरोप लगाया कि, “CAG की रिपोर्ट साबित करती है कि किसानों के प्रशिक्षण, राहत या कृषि उपकरण जैसी जरूरी सुविधाओं पर नाममात्र का पैसा खर्च किया गया, जबकि करोड़ों की रकम गाड़ियों में उड़ाई गई।”
FDF यानी उर्वरक विकास निधि का उद्देश्य था—किसानों को उर्वरकों के बेहतर प्रबंधन, वितरण, भंडारण और कृषि समितियों के सशक्तिकरण में मदद देना। लेकिन रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इन बुनियादी उद्देश्यों की उपेक्षा हुई और वाहन ख़र्च को प्राथमिकता दी गई।
CAG ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि पंजीयक, सहकारी समितियों द्वारा इस निधि का किसान-कल्याण की जगह सरकारी वाहनों की खरीद और संचालन पर खर्च किया गया।
इस पूरे मुद्दे पर विवाद तब और बढ़ गया जब मौजूदा कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना से मीडिया ने सवाल पूछा। उनका जवाब था—“तो क्या गाड़ी नहीं खरीदें?”
इस बयान को लेकर विपक्ष ने तीखा तंज कसा और कहा कि यह सरकार की संवेदनहीनता और फंड के दुरुपयोग को दर्शाता है।
विपक्ष ने इसे सरकार, अधिकारियों और माफिया के बीच गठजोड़ का उदाहरण बताया है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
इस खुलासे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसानों के नाम पर बनने वाले फंड का सही इस्तेमाल कभी हो पाएगा? या फिर ऐसी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह जाएंगी?










