
KPN24:- छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित साहित्यिक हस्ती और प्रख्यात हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे की जयंती के अवसर पर उनकी अंतिम काव्य कृति “मैं छत्तीसगढ़ बोलता हूँ” का लोकार्पण राजधानी रायपुर स्थित मैक कॉलेज ऑडिटोरियम में भव्य समारोह के बीच सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने डॉ. दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे केवल एक हास्य कवि नहीं थे, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के सच्चे प्रतिनिधि थे। उन्होंने कहा, “डॉ. सुरेन्द्र दुबे जी की कविताएं केवल गुदगुदाती नहीं थीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का कार्य भी करती थीं। वे जहाँ भी गए, छत्तीसगढ़ की पहचान को साथ लेकर गए।”
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि “आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी लेखनी के माध्यम से वे हमेशा जीवित रहेंगे। उनकी अंतिम रचना ‘मैं छत्तीसगढ़ बोलता हूँ’ न केवल उनके साहित्यिक योगदान का प्रतीक है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की आत्मा की अभिव्यक्ति भी है।”
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि डॉ. दुबे ने अपने हास्य-व्यंग्य और छत्तीसगढ़ी साहित्य के माध्यम से राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाई। उन्होंने कहा, “वे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और लोकसंस्कृति के सशक्त प्रवक्ता थे। उनके लेखन में जनचेतना और सांस्कृतिक स्वाभिमान स्पष्ट झलकता है।”
कार्यक्रम में धरसीवां विधायक व पद्मश्री अनुज शर्मा ने आलेख पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के अंत में श्रीमती शशि दुबे ने सभी अतिथियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस गरिमामय अवसर पर कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन, दुर्ग सांसद विजय बघेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, सांस्कृतिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन सुरेन्द्र दुबे फाउंडेशन द्वारा किया गया।
डॉ. सुरेन्द्र दुबे की यह अंतिम कृति न केवल उनके साहित्यिक जीवन की उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ने वाली रचना भी मानी जा रही है।










