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हाईकोर्ट ने शिक्षक की अपील खारिज की, पॉक्सो एक्ट के तहत सजा बरकरार

KPN24:- बिलासपुर हाईकोर्ट ने छात्राओं से यौन दुर्व्यवहार के आरोपी शिक्षक की आपराधिक अपील को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषसिद्धि और सजा को सही ठहराते हुए कहा कि शिक्षक का पद विश्वास और जिम्मेदारी का होता है, और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार पेशेवर कदाचार ही नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने निचली अदालत के आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि नाबालिग पीड़िताओं के बयान स्पष्ट और विश्वसनीय हैं। हाईकोर्ट ने माना कि यह अपील विशेष न्यायाधीश (एफटीएससी), पॉक्सो एक्ट, मुंगेली के उस आदेश के खिलाफ थी जिसमें 2 मार्च 2022 को आरोपी शिक्षक कीर्ति कुमार शर्मा को दोषी ठहराया गया था।

सजा और जुर्माने की जानकारी

मूल फैसले में शर्मा को पॉक्सो अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत दो साल, एक माह, छह दिन की जेल और ₹2500 जुर्माने से दंडित किया गया था। अपीलकर्ता सजा अवधि पूरी कर चुका है और जुर्माना राशि भी जमा कर चुका है।

जांच में सामने आए तथ्य

मामला मुंगेली के बरेला स्थित शासकीय मिडिल स्कूल का है, जहां शर्मा गणित एवं अंग्रेजी शिक्षक के तौर पर पदस्थ था। आरोप है कि वह बिना अधिकारिता के विज्ञान पढ़ाता था और कक्षा के दौरान छात्राओं से अनुचित स्पर्श करता तथा अभद्र टिप्पणियाँ करता था।

शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रतिमा मंडलोई को जांच सौंपी। 28 मार्च 2019 को हुई जांच में शिक्षकों और छात्राओं से लिखित बयान लिए गए, जिनमें आरोपों की पुष्टि हुई।

छात्राओं ने बताया कि वह पढ़ाई के दौरान आपत्तिजनक तरीके से उन्हें छूता और सार्वजनिक रूप से तंबाकू-गुटखा सेवन करते हुए अशोभनीय भाषा का प्रयोग करता। यहां तक कि जब छात्राएं शौचालय जातीं, तब भी वह अपमानजनक टिप्पणियां करता था।

अदालत का रुख

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियाँ न केवल शिक्षा के माहौल को दूषित करती हैं बल्कि पीड़ित छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि शिक्षक का आचरण समाज के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला है, इसलिए उसकी दोषसिद्धि में कोई त्रुटि नहीं है।

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Author: Kpn 24

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