
KPN24:- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। हाल ही में पुलिस ने इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया था। अब इस पूरे मामले में बड़ा खुलासा हुआ है कि रायपुर में जो हेरोइन चिट्टा बेचा और सप्लाई किया जा रहा है, वह असली नहीं बल्कि सिंथेटिक हेरोइन है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिंथेटिक नशा और भी ज्यादा खतरनाक है।
मिली जानकारी के अनुसार, सिंथेटिक हेरोइन तैयार करने में हाथी को बेहोश करने वाली दवाओं जैसे एटार्फिन और कार फेंटानिल का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये दवाएं इतनी जहरीली हैं कि बेहद मामूली मात्रा भी इंसान की जान ले सकती है।
फेंटेनाइल – हेरोइन से 50 गुना ज्यादा असरदार
सिंथेटिक हेरोइन का सबसे आम रूप फेंटेनाइल है, जो हेरोइन से करीब 50 गुना अधिक असरदार माना जाता है। एक किलो फेंटेनाइल से पांच लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। यही वजह है कि पुलिस और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बेहद घातक मानते हैं।
चिट्टा का मतलब और बढ़ती परिभाषा
पंजाब और उत्तरी भारत के हिस्सों में ‘चिट्टा’ का मतलब सफेद होता है। पहले यह शब्द सिर्फ हेरोइन के लिए प्रयोग होता था क्योंकि उसका रंग सफेद होता है। लेकिन अब हर तरह के सफेद रंग के सिंथेटिक ड्रग्स, जैसे एमडीएमए, मेथ और अन्य नशे, को भी चिट्टा कहा जाने लगा है।
शरीर पर असर
विशेषज्ञ बताते हैं कि हेरोइन और मेथ जैसे ड्रग्स सीधे सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर डालते हैं और दिमाग की गतिविधियों को तेज कर देते हैं। इन्हें कई तरीकों से लिया जाता है – निगलकर, नाक से सूंघकर, धुएं के जरिए या फिर इंजेक्शन लगाकर।
मॉरफीन से भी ज्यादा खतरनाक
मॉरफीन अफीम से बनने वाली एक औषधीय दवा है और नियंत्रित मात्रा में दर्दनिवारक के रूप में दी जाती है। यह ब्लैक मार्केट में आसानी से उपलब्ध नहीं होती। लेकिन हेरोइन मॉरफीन से तीन गुना ज्यादा असरकारक है और अवैध रूप से आसानी से बनाकर बेच दी जाती है। यही कारण है कि इसका दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
पुलिस की सख्ती
पुलिस का कहना है कि सिंथेटिक ड्रग्स का यह नेटवर्क बेहद खतरनाक है और इसकी सप्लाई रोकने के लिए लगातार कार्रवाई जारी है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे ड्रग्स सिर्फ नशे की लत ही नहीं लगाते बल्कि थोड़ी सी मात्रा में ही इंसान की जान ले सकते हैं।










