
KPN24:- छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवा रायपुर में आयोजित भव्य समारोह में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन का लोकार्पण किया, जिसके साथ ही राज्य की 25 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हो गई। राज्य निर्माण के रजत जयंती वर्ष में यह लोकार्पण छत्तीसगढ़ की प्रगति, परंपरा और लोकतांत्रिक गौरव का प्रतीक बन गया।
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
लोकतांत्रिक परंपराओं का गौरव बढ़ाएगा नया विधानसभा भवन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह क्षण पूरे देश और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का है। प्रधानमंत्री मोदी सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब इस भवन में ऐसे निर्णय लिए जाएंगे जो राज्य की समृद्धि और जनता की आकांक्षाओं को नई दिशा देंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा, “आज का दिन भगवान श्रीराम की ननिहाल और माता कौशल्या की धरती छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम है। अटल जी ने राज्य बनाया और मोदी जी इसे संवार रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार पिछले दो वर्षों से प्रधानमंत्री की गारंटी को पूरा करने में जुटी है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है। उन्होंने बताया कि नया विधानसभा भवन 80 प्रतिशत स्वदेशी मटेरियल से बना है — सदन में बस्तर के सागौन की लकड़ी, धान की बालियों की कलाकारी और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक हर हिस्से में देखने को मिलती है।
खूबसूरत इमारत ही नहीं, छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आस्था का प्रतीक
नया विधानसभा भवन केवल एक आधुनिक संरचना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का जीवंत प्रतीक है। राज्य गठन के बाद राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई विधानसभा को अब 25 वर्षों बाद अपना स्थायी, भव्य और अत्याधुनिक भवन प्राप्त हुआ है।
धान का कटोरा और बस्तर की शिल्पकला की झलक
‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को भवन की वास्तुकला में सुंदरता से पिरोया गया है। सदन की छत पर धान की बालियों की नक्काशी की गई है, जो कृषि प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के काष्ठ शिल्पियों द्वारा तैयार किए गए हैं, जिससे भवन परंपरा और आधुनिकता का संगम बन गया है।
भविष्य की जरूरतों के अनुरूप स्मार्ट विधानसभा
नया विधानसभा भवन पूरी तरह स्मार्ट और पेपरलेस सिस्टम से सुसज्जित है। सदन को 200 सदस्यों तक विस्तारित किया जा सकता है। भवन में 500 सीटों वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, 200 सीटर सेंट्रल हॉल, और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
324 करोड़ की लागत से 51 एकड़ में बना परिसर
यह भवन 324 करोड़ रुपए की लागत से 51 एकड़ क्षेत्र में निर्मित किया गया है। इसमें तीन मुख्य विंग — विंग-ए (सचिवालय), विंग-बी (सदन व मुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष कार्यालय) और विंग-सी (मंत्रालय कार्यालय) शामिल हैं।
हरित तकनीक और पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान
भवन का निर्माण हरित तकनीक से किया गया है। परिसर में सोलर प्लांट, वर्षा जल संचयन सरोवर, और ऊर्जा संरक्षण प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जिससे यह भवन पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ विकास का उदाहरण बन गया है।
तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक
छत्तीसगढ़ विधानसभा का यह नया भवन तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदों, आकांक्षाओं और आत्मगौरव का प्रतीक है। यह केवल लोकतंत्र का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का गौरवपूर्ण प्रतीक बनकर नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।










