
KPN24:- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का एक अनोखा मामला सामने आया था जिसमें स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरण और रीएजेंट खरीदी की आड़ में अफसरों ने घोटाले का खुला खेल खेला। उपकरणों के साथ सौ टेस्ट किट फ्री में देने का नियम था, जिसे हटाकर अधिकारियों मोक्षित कार्पोरेशन से 121 करोड़ की स्टार्टर टेस्ट किट की खरीदी कराई गई।
स्वास्थ्य संस्थानों में मशीन इंस्टालेशन की झूठी जानकारी निर्धारित पोर्टल में दर्ज की गई, जिससे संबंधित कंपनी को 44 करोड़ का भुगतान हो गया। अफसर सारा तिकड़म मोक्षित कॉर्पोरेशन के एमडी के इशारे पर करते रहे। इसके लिए उनका लगातार संपर्क रहा, जो आरोपियों के फोन की जांच में सामने आया है।
ईओडब्ल्यू ने दवा निगम और स्वास्थ्य संचालनालय के माध्यम से हुए घोटाले का चालान पत्र न्यायालय में पेश किया है। चालान में आरोपियों द्वारा सप्लायर मोक्षित कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत काम करने का उल्लेख है। मोक्षित के कंपनी ने एक रैकेट बनाकर इस घोटाले को अंजाम दिया। चालान में जिक्र किया गया है कि दवा कॉर्पोरेशन में बसंत कुमार कौशिक की सीजीएमएससी में पदस्थापना शशांक चोपड़ा के प्रभाव से हुई थी और वे मोक्षित नेटवर्क के रणनीतिक सदस्य थे। सीडीआर में उनके बीच नियमित संपर्क होने की पुष्टि हुई है। बसंत ने क्षिरोद्र रौतिया के साथ मिलकर फ्री के टेस्ट को खरीदने खेल खेला था।










