
KPN24:-छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भोपाल में मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा विकसित नवीनतम सिंचाई तकनीक PIN (Pressure Irrigation Network) की विस्तृत प्रस्तुति का अवलोकन किया। यह प्रस्तुति मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा द्वारा दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस तकनीक के व्यापक और चरणबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
तकनीक की विशेषताएँ
प्रस्तुति में बताया गया कि पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई की तुलना में यह आधुनिक तकनीक कई गुना प्रभावशील है:
पारंपरिक सिंचाई दक्षता: लगभग 35%
प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क दक्षता: बढ़कर 65% तक
पाइपलाइन आधारित प्रणाली से रिसाव एवं अपव्यय में भारी कमी
भू-अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम, परियोजनाएँ कम लागत और समय से पूरी
ऊर्जा बचत एवं समान जल वितरण की सुविधा
अपर मुख्य सचिव राजौरा ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक से सिंचाई की जा रही है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इससे किसानों की उत्पादकता और जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा:
“यह उन्नत तकनीक भविष्य की जल प्रबंधन चुनौतियों के अनुरूप है। छत्तीसगढ़ में भी इस तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके।”
उन्होंने अधिकारियों को इस तकनीक का अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रणाली से भू-अधिग्रहण की आवश्यकता घटेगी, जल संरक्षण होगा और ऊर्जा की भी महत्वपूर्ण बचत होगी।
उपस्थित अधिकारी
इस अवसर पर — सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव (छत्तीसगढ़), विनोद देवड़ा, प्रमुख अभियंता (म.प्र. जल संसाधन विभाग), विकास राजोरिया, अधीक्षण यंत्री, शुभंकर विश्वास, अधीक्षण यंत्री
उपस्थित रहे।
प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क क्यों लाभदायक
पानी सीधे पाइपलाइनों से खेत तक
अपव्यय लगभग शून्य
टेल एंड क्षेत्रों तक भी पर्याप्त जल प्राप्त
फसल उत्पादकता में वृद्धि और किसान आय में बढ़ोतरी










