
KPN24:- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक शादीशुदा मुस्लिम युवक द्वारा एक हिंदू युवती को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और बार-बार गर्भपात कराने का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में तनाव पैदा कर दिया है, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने आरोपी की सार्वजनिक रूप से पिटाई की और उसे पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, भानुप्रतापपुर निवासी असलम खान, जो क्रेन व्यवसाय और कांकेर रोड पर एक कैफे का संचालन करता है, ने अपने कैफे में काम करने वाली एक हिंदू युवती को शादी का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के गर्भवती होने पर आरोपी ने दो बार उसका गर्भपात कराया। तीसरी बार गर्भवती होने पर असलम ने फिर से गर्भपात के लिए दबाव बनाया, जिससे परेशान होकर युवती ने स्थानीय हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी दी।
रविवार को हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने असलम को मुख्य चौक पर पकड़कर उसकी जमकर पिटाई की। कार्यकर्ताओं ने आरोपी को चप्पलों की माला पहनाई और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। इसके बाद उसे पुलिस थाने ले जाया गया, जहां पीड़िता के बयान के आधार पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी और जबरन गर्भपात के आरोप में मामला दर्ज किया गया।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
जांच में पता चला है कि असलम खान पहले से शादीशुदा है और उसने पीड़िता को धोखे में रखकर यह अपराध किया। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने इस घटना पर कड़ा रोष जताया है। संगठनों का आरोप है कि यह एक सुनियोजित तरीके से हिंदू युवतियों को निशाना बनाने का मामला है।
पुलिस की कार्रवाई
भानुप्रतापपुर पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कर असलम खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (दुष्कर्म), 420 (धोखाधड़ी), और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अतिरिक्त, जबरन गर्भपात के आरोपों की जांच के लिए मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
हिंदू संगठनों ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए इसे धार्मिक आधार पर लक्षित अपराध करार दिया है। संगठनों ने मांग की है कि इस तरह के मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की, तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
यह घटना सामाजिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। पहला, यह मामला धोखे और शारीरिक शोषण के साथ-साथ महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के उल्लंघन को दर्शाता है। जबरन गर्भपात जैसे कृत्य न केवल नैतिक रूप से गलत हैं, बल्कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम, 1971 के तहत भी गैरकानूनी हो सकते हैं, यदि यह पीड़िता की सहमति के बिना किया गया हो।
दूसरा, हिंदू संगठनों द्वारा सार्वजनिक रूप से आरोपी की पिटाई और अपमान ने कानून के शासन पर सवाल उठाए हैं। हालांकि संगठनों का गुस्सा समझा जा सकता है, लेकिन भीड़ द्वारा सजा देना कानूनी प्रक्रिया को कमजोर करता है और हिंसा को बढ़ावा दे सकता है। यह घटना सामुदायिक तनाव को भी उजागर करती है, जो धार्मिक आधार पर और गहरा सकता है। पुलिस को इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच करनी होगी ताकि पीड़िता को न्याय मिले और सामुदायिक तनाव को रोका जा सके। साथ ही, स्थानीय प्रशासन को सामाजिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर स्थिति को नियंत्रित करना होगा। इस तरह के मामलों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान और कठोर कानूनी ढांचे की जरूरत है, जो महिलाओं को शोषण से बचाए और धार्मिक आधार पर सामाजिक विभाजन को रोके।










