
मनीष विद्यार्थी खरगोन
KPN24:- आपातकालीन सेवा का तमगा लिए चलने वाली 108 एम्बुलेंस व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। करोड़ों की लागत से संचालित और 52 गाड़ियों के दावे के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि जरूरत की घड़ी में मरीजों को प्राइवेट एम्बुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है।
Emergency Management and Research Institute द्वारा संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा का उद्देश्य किसी भी हादसे के बाद मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल और जरूरत पड़ने पर बेहतर इलाज के लिए इंदौर जैसे बड़े केंद्र तक पहुंचाना है। लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों की कथित लापरवाही और जिला अस्पताल प्रबंधन के सीधे नियंत्रण के अभाव में यह सेवा अपने मूल मकसद से भटकती नजर आ रही है।
4 में से एक भी नहीं इंदौर जाने लायक
हाल ही में Maheshwar में एक सड़क हादसे के बाद घायल मरीज को इंदौर रेफर किया गया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।
करीब एक घंटे तक चली उहापोह के दौरान चार एम्बुलेंस मौके पर पहुंचीं, लेकिन परिजनों का आरोप है कि एक भी एम्बुलेंस इंदौर जाने की स्थिति में नहीं थी। इस बीच मरीज दर्द से कराहता रहा और परिजन बेबस होकर इधर-उधर दौड़ते रहे।
आखिरकार, घबराहट और मजबूरी में करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद प्राइवेट एम्बुलेंस बुलाकर मरीज को इंदौर रवाना किया गया। सवाल यह है कि जब 52 गाड़ियां जिले में तैनात हैं, तो आपात स्थिति में एक भी वाहन लंबी दूरी के लिए तैयार क्यों नहीं मिला?
बदनाम होती जा रही इमरजेंसी सेवा
108 एम्बुलेंस सेवा पर पहले भी कई बार उंगलियां उठ चुकी हैं।
शराब ठेके के सामने एम्बुलेंस खड़ी कर निजी काम करने के आरोप
एम्बुलेंस में शराब परिवहन की चर्चाएं
मरीजों की जगह सवारियां ढोने के मामले
इन घटनाओं ने न सिर्फ सेवा की साख पर बट्टा लगाया है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी डगमगाया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
महेश्वर घटना पर जिम्मेदारों का कहना है कि मरीज के परिजन पहले जिला अस्पताल तक जाने की बात कह रहे थे, बाद में इंदौर ले जाने की मांग की गई, जिसके कारण कुछ देर हुई। अधिकारियों के अनुसार, इंदौर के लिए एम्बुलेंस भेजी जा रही थी, लेकिन परिजनों ने स्वयं प्राइवेट एम्बुलेंस बुला ली। लापरवाही के आरोपों को उन्होंने निराधार बताया है और कहा कि स्टाफ सदैव सेवा में तत्पर रहता है।
बड़ा सवाल: जवाबदेही कौन तय करेगा?
लाखों-करोड़ों की लागत से संचालित 108 सेवा अगर जरूरत की घड़ी में काम न आए, तो इसकी जवाबदेही किसकी है? क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की जांच करेगा? क्या एम्बुलेंसों की तकनीकी स्थिति और स्टाफ की कार्यप्रणाली की समीक्षा होगी?










