
भविष्य की आहट / डा. रवीन्द्र अरजरिया
KPN24:- देश में दलगत नेताओं के परिजनों, संबंधीजनों तथा स्वजनों को राजनैतिक दबाव के चलते लाभ देने के अनेक उदाहरण आज भी पैदा हो रहे हैं। अचानक पूंजीपति बनने वाले की संख्या में तेजी से बढोत्तरी हो रही है। सरकारी औपचारिकताओं को हाशिये पर रखकर सुविधायें पहुंचाने के अनेक मामले स्वाधीनता के बाद से ही सामने आते रहे हैं।
यूं तो घोटालों की लम्बी फेरिस्त है परन्तु बानगी के तौर पर सन् 1948 का जीप खरीद घोटाला जिसमें वीके मेनन, सन् 1951 का साइकिल आयात घोटाला जिसमें एसए वेंकटरमण, सन् 1956 का बीएचयू फण्ड घोटाला, सन् 1958 का हरिदास मूंदडा मामला जिसमें टीटी कृष्णामचारी, सन् 1960 का तेजा लोन स्कैम, सन् 1963 का प्रताप सिंह कैरों स्कैम, सन् 1965 का पटनायक ‘कलिंग ट्यूब्स’ मामला जिसमें बीजू पटनायक, सन् 1975 का मारुति घोटाला जिसमें इंदिरा गांधी, सन् 1976 का कुओ आयल डील, सन् 1981 का अंतुले ट्रस्ट मामला जिसमें एआर अंतुले, सन् 1987 का एचडीडब्ल्यू दलाली मामला, सन् 1987 का बोफोर्स घोटाला जिसमें राजीव गांधी, सन् 1989 का सेंट किट्स मामला जिसमें वीपी सिंह, सन् 1990 का चारा घोटाला जिसमें लालू प्रसाद यादव,सन् 1991 का हवाला घोटाला जिसमें एसके जैन, सन् 1992 का हर्षद मेहता काण्ड, सन् 1992 का इंडियन बैंक मामला, सन् 1992 का बाम्बे स्टाक एक्सचेन्ज घोटाला जिसमें हर्षद मेहता, सन् 1992 का सिक्यूरिटी स्कैम, आईपीएल घोटाला जिसमें ललित मोदी, सत्यम घोटाला, स्टाम्प घोटाला, सन् 1993 का झारखण्ड मुक्ति मोर्चा मामला जिसमें शिबू सोरेन, सन् 1994 का चीनी घोटाला जिसमें कल्पनाथ राय, सन् 1995 का जूता घोटाला जिसमें सोहिन दया, तहलका काण्ड जिसमें जार्ज फर्नाडीज, लक्खू भाई पाठक मामला जिसमें नरसिंहराव,सन् 1999 का हसन अली टैक्स मामला, कामनवेल्थ गेम्स घोटाला जिसमें मनमोहन सिंह, विजय माल्या प्रकरण, पीएनबी घोटाला जिसमें नीरव मोदी तथा मेहुल चौकसी, रोटोमैक घोटाला, सन् 2000 का मैच फिक्सिंग मामला, बराक मिसाइल सौदा मामला, यूटीआई घोटाला, तेल के बदले अनाज मामला जिसमें नटवर सिंह, ताज कैरीडोर मामला जिसमें मायावती, कोडा मनीलांडरिंग मामला जिसमें मधु कोडा, ताबूत घोटाला, सन् 2002 का टेलीकाम स्कैम जिसमें सुखराम शर्मा, यूरिया घोटाला जिसमें सीएस रामकृष्णन, सन् 2007 का 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला जिसमें ए. राजा, सन् 2010 का आदर्श हाउसिंग घोटाला जिसमें अशोक चव्हाण,सन् 2012 का वीवीआईपी हेलिकाप्टर घोटाला जिसमें एसपी त्यागी, सन् 2012 का नेशनल हेराल्ड मामला जिसमें सोनिया गांधीसन् 2013 का डीएलएफ भूमि हडप मामला जिसमें राबर्ड वाड्रा,सन् 2013 का केरल सौर पैनल घोटाला जिसमें सीएम चांडी, सन् 2015 का वोट के लिए नोट मामला जिसमें एल्विस स्टीफेंसन,सन् 2020 का केरल गोल्ड तस्करी मामला जिसमें पिनाराई विजयन, सन् 2022 का शराब घोटाला जिसमें अरविन्द केजरीवाल पर भी गम्भीर आरोप लगाये गये थे। सत्ताधिकार के सामने मुंह खोलने वालों की हमेशा ही दुर्गति होती रही है। निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए पद के दुरुपयोग का फैशन सा चल निकला है। अब तो भारत के घोटालों को आदर्श मानकर विदेशों में भी यह रीतियां तेजी से विकसित हो रहीं है। आपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका का पाकिस्तान के साथ सहयोगात्मक रवैया यूं ही नहीं रहा है। ज्ञातव्य है कि कश्मीर के पहलगाम में विगत 22 अप्रेल को इस्लामिक आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। भारतीय नागरिकों का आक्रोश और सरकार का कडा रुख देखते हुए पाकिस्तान ने 27 अप्रेल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर और पुत्र एरिक ट्रंप, डोनाल्ड जूनियर की क्रिप्टो को समर्पित कम्पनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल से एक अनुबंध कर लिया। यह अनुबंध सन् 2024 में गठित अमेरिकी कम्पनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल तथा सन् 2025 में गठित पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के मध्य हुआ जिसमें काउंसिल की ओर से चांग पेंग झाओ को सलाहकार नियुक्त किया गया। इस पूरे परिदृश्य में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने पुत्र सलमान शहबाज की कम्पनी एसएसई टेक्नोलाजीज को क्रिप्टो माइनिंग नेटवर्क तैयार करने हेतु जोड दिया। उल्लेखनीय है कि पहलगाम हमले के ठीक पहले पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल की स्थापना की गई थी। यानी यह सब कुछ पूर्व निर्धारित षडयंत्र के तहत चल रहा था जिसमें राष्ट्रवाद की आड में ट्रंप का परिवारवाद पूरी तरह से शामिल था। वास्तविकता तो यह है कि अमेरिकी आवाम के जागरूक होने के कारण क्रिप्टो को वहां पर अपेक्षित विस्तार पाने में कठिनाई हो रही है जिसका विकल्प पाकिस्तान को बनाया जा रहा है ताकि यहां से ट्रंप परिवार की कम्पनी दुनिया भर में पांव पसार सके। ऐसा ही परिवारवाद तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन के कृत्यों भी से स्पष्ट होता है। उनकी पुत्री सुमैये अर्दोआन का निकाह सेल्युक वायराक्त से हुआ था जो कि बायकर कम्पनी का मुखिया है। यह कम्पनी बायकर यीहा III सहित अनेक खतरनाक ड्रोन बनाती है जिसका युध्द के मैदान में उपयोग होता है। तुर्किये के राष्ट्रपति अर्दोआन के दामाद ने पाकिस्तान को न केवल युध्द में उपयोग होने वाले खतरनाक ड्रोन्स की आपूर्ति की बल्कि ड्रोन्स आपरेटर्स भी उपलब्ध कराये ताकि भारत को पराजित किया जा सके। ऐसा ही प्रयास रूस-यूक्रेन जंग में भी तुर्किये ने किया था। बायकर कम्पनी ने यूक्रेन को ड्रोन सहित अन्य संसाधन भी उपलब्ध करवाये थे। यह अलग बात है कि रूस के सामने अमेरिकी उपकरण और तुर्किये हथियार ज्यादा प्रभावी नहीं हो रहे हैं। ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि दुनिया के अधिकांश नेताओं व्दारा स्वार्थ की दहलीज पर अपने पद, दायित्व और गरिमा की बलि चढाई जा रही है। सरकारी प्रक्रियाओं को मनमाफिक मोडकर निजी स्वार्थों के लक्ष्य का भेदन करने वाले धन की अट्टालिकाओं में विलासता के हिंडोले पर झूल रहे हैं।










