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आपातकाल के हम भी साक्षी, अमानवीय यातनाएं सहीं, 9 जीवित मीसाबंदियों का इंदौर महापौर करेंगे सम्मान

मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर।

KPN24:- देश में रातोंरात आपातकाल की घोषणा कर 25-26 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने तानाशाही से लोकतंत्र की हत्या करने का षडय़ंत्र रचा था। उन्होंने हजारों सत्ता विरोधियों और विपक्षी नेताओं को न सिर्फ जेलों में ठूंसा बल्कि उन्हें सरकार की नीतियों के पक्ष में सरेंडर कराने के लिए उन पर कई अमानवीय अत्याचार किए। जिनका साक्षी हमारा जिला भी है

इंदिरा गांधी ने मनमानी कर इमरजेंसी के दौरान हजारों अविवाहितों की नसबंदी करवाने तक का पाप किया था। ऐसे अत्याचारों के भुक्तभोगी मीसाबंदियों हमारे जिले में भी रहे है और उनमें से कुछ अभी जीवित भी है। जिनसे भाजपा युवा पीढ़ी को रुबरु कराना चाहती हैं। इसको लेकर राजस्थानी भवन में आज एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें जिले के 9 जीवित मीसाबंदियों का सम्मान इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि आपातकाल में कांग्रेस सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ उस समय के जिले के छात्रनेता, मजदूर नेता, प्राध्यापक, राजनीतिक-सामाजिक सजग जागरुक व्यक्तियों ने इंदिरा गांधी की राजनीतिक आलोचना की तो उनको गिरफ्तार कर लिया गया। विशेषकर सनातनी सोच, आरएसएस और एबीवीपी से जुड़े लोगों पर आपातकाल का कहर विशेष रुप से बरपाया गया था। जिले में इन यातनाओं को भोगने वालों की लंबी सूची है। जिले का इतिहास केवल पर्यटन तक ही सीमित नहीं है बल्कि आजादी की जंग से लेकर आपातकाल की यातनाएं सहने में भी हमारा जिला पीछे नहीं रहा। करीब 50 से ज्यादा मीसाबंदी सूचीबद्ध है, जिनमें से 9 अभी जीवित भी है। जिन्हें नमन कर आज राजस्थानी भवन में संविधान हत्या दिवस मनाया जाएगा।
इसलिए की थी इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा
1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में इंदिरा गांधी को चुनाव में धांधली करने का दोषी पाया गया और उन पर छह वर्षों तक कोई भी पद संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया था, मामला 1971 में हुए लोकसभा चुनाव का था। जिसमें इंदिरा ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी राज नारायण को पराजित किया था, लेकिन चुनाव परिणाम आने के चार साल बाद राज नारायण ने हाईकोर्ट में चुनाव परिणाम को चुनौती दी, जिसमें उनकी दलील थी कि इंदिरा गांधी ने चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। तय सीमा से अधिक पैसे खर्च किए और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया। अदालत ने इन आरोपों को सही ठहराया। इंदिरा गांधी ने इस फैसले को मानने से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की घोषणा की और 26 जून को आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी थी।
अमित शाह ने की थी संविधान हत्या दिवस मनाने की घोषणा
बीते साल 12 जुलाई 2024 को गृह मंत्री अमित शाह ने इस अत्याचार को सहने वाले देशवासियों के सम्मान में और आपातकाल को वास्तविक रुप से संविधान की हत्या को मानते हुए इस दिन को संविधान हत्या दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस दिन मीसाबंदियों को उनके बलिदान के लिए याद किया जाता है और उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया गया। उन्हीं के अनुरुप आज भी मीसाबंदियों को सेवाएं सरकार द्वारा दी जाती है।
बुरहानपुर का इतिहास भी साक्षी, 52 में से 9 मीसाबंदी जीवित
25 जून 1975 को आपातकाल में गिरफ्तार हुए मीसाबंदियों की सूची लंबी है और इनमें करीब 52 नाम जिले से है लेकिन अब जीवित मीसाबंदियों की संख्या घटकर मात्र 9 रह गई है। इनमें ज्ञानेश्वर चिमनराव मोरे, प्रकाश बाबूराव कानुनगो, अधिवक्ता अरुण शेंडे, जयकुमार नंदकिशोर देवड़ा, लक्ष्मण फकीरा महाजन, विश्वनाथ महिपथ महाजन, शरद श्रीकृष्ण सांवले, भास्कर बालचंद केनन और मारुती जाधव का नाम शामिल है। इन्हें आज सम्मानित किया जाएगा।

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Author: Kpn 24

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