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ACB के एडीशनल एसपी की गाड़ी से लाखों की नगदी जप्त,

KPN24:- जिस एजेंसी की जवाबदेही होती है  भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना और रिश्वत लेने वाले व आय से अधिक संपत्ति रखने वाला को पकड़ना, लेकिन जब उसी एजेंसी के अधिकारी की गाड़ी से लाखों की नगद जप्त किया जाए तो फिर ACB पर सवाल उठना लाजमी हो जाता है ऐसा ही एक मामला राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की साख उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब उसी एजेंसी के एक सीनियर अफसर की गाड़ी से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई।

मिली जानकारी अनुसार राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की साख उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब उसी एजेंसी के एक सीनियर अफसर की गाड़ी से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई। एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर शुक्रवार को की गई इस कार्रवाई में स्पेशल यूनिट द्वितीय की टीम ने एसीबी के एडिशनल एसपी जगराम मीणा की कार की तलाशी ली, जिसमें 9 लाख 35 हजार रुपये नकद मिले।

यह कार्रवाई जयपुर से सटे शिवदासपुरा टोल प्लाजा पर उस समय की गई, जब जगराम मीणा झालावाड़ से जयपुर लौट रहे थे। सूत्रों के अनुसार, मीणा की गाड़ी की तलाशी एसीबी की ही एक विशेष टीम ने ली, जिसका नेतृत्व एसीबी के एडिशनल एसपी पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ कर रहे थे। टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि गाड़ी में अवैध नकदी हो सकती है, जिसके आधार पर यह जांच की गई।

कार्रवाई के दौरान मीणा की मौजूदगी में कार की तलाशी ली गई और नकदी मिलने के बाद नोटों की गिनती कर उन्हें जब्त कर लिया गया। फिलहाल नकदी के स्रोत के बारे में पूछताछ की जा रही है। एडिशनल एसपी राठौड़ ने कहा कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत की गई है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो, अगर संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसीबी मुख्यालय इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। जगराम मीणा फिलहाल बयान देने से बच रहे हैं और सूत्रों का कहना है कि जल्द ही उनसे औपचारिक पूछताछ भी की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल किसी तरह की ढील नहीं बरती जा रही है।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर इस सवाल को खड़ा कर दिया है कि जब भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी के अफसर ही शक के घेरे में हों, तो फिर आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा? यह घटना ना सिर्फ एसीबी की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, बल्कि सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति की प्रभावशीलता पर भी गंभीर बहस की मांग करती है।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जांच जारी है और आने वाले दिनों में जगराम मीणा के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है।

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Author: Kpn 24

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