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आधुनिक सुविधाओं से लैस कुटुम्ब न्यायालय का हुआ शुभांरभ

मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर

KPN24:- करीब सवा साल पहले लोकार्पित हुए नवीन सर्वसुविधायुक्त भवन में अंतत: सोमवार से कुटुम्ब न्यायालय शुरु कर दिया गया। इससे पहले यह जिला न्यायालय भवन के ही एक कक्ष में संचालित किया जा रहा था लेकिन अब इसे दो मंजिला भवन में अलग से संचालित किया जाएगा। इस न्यायालय के न्यायाधीश शेख सलीम ने इसे पक्षकारों के लिए सुविधाजनक बताया और कहा कि यहां तक आने में पक्षकारों का समय भी बचेगा और सुनवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों को होने वाली समस्याओं से भी निजात मिलेगी।

बता दें कि अब कुटुम्ब न्यायालय का संचालन सोमवार से यातायात और महिला पुलिस थाने के पास बने नवनिर्मित भवन में किया जाएगा। इससे जिला न्यायालय तक जाने की दूरी पक्षकारों की कम होगी और सामने ही महिला थाना और कलेक्टोरेट होने से उनकी दौड़भाग में भी राहत मिलेगी। करीब सवा साल पहले इसका लोकापर्ण किया गया था लेकिन पर्याप्त स्टॉफ और संसाधनों के अभाव में इसके शुभारंभ में विलंब हुआ।
ऐसा है कुटुम्ब न्यायालय
बता दें कि पक्षकारों की सुविधा की दृष्टि से ये कुटुम्ब न्यायालय बेहद सुविधाजनक होगा। क्योंकि इसके सामने ही महिला पुलिस थाना, कलेक्टोरेट कार्यालय और केंटिन भी है। इस दो मंजिला इमारत के दोनों तल पर महिला-पुरुष और दिव्यांगों के लिए अलग-अलग सुविधाघर बने है। इसके अलावा महिला और पुरुष पक्षकारों के लिए अलग-अलग काउंसलिंग रुम, बच्चों के लिए मनोरंजन कक्ष, वेटिंग ऐरिया, स्टोर रुम, न्यायालय डेस्क (कोर्ट रुम), प्रशासनिक अधिकारी, उप प्रशासनिक अधिकारी, स्टेनो, अभिलेख, कम्प्यूटर और नजारत के लिए अलग-अलग कक्ष बने है और महिला और पुरुष पक्ष के लोगों के लिए अलग-अलग कॉमन रुम भी बनें है। इसके अलावा परिसर में गार्डन, गार्ड रुम और स्टॉफ, वकील और पक्षकारों के लिए पार्किंग ऐरिया भी बनाया गया है।
पारिवारिक विवादों में हो रहा है ईजाफा
कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश शेख सलीम ने बताया कि सहनशीलता की कमी ने पति-पत्नी के रिश्तों की डोर कच्ची कर दी है। अब छोटी-छोटी बातों पर हुए विवाद बढक़र तलाक तक पहुंच जाते है। लगातार सुनवाई, कोर्ट द्वारा आपसी समझौतों के प्रयास और प्रकरणों के निपटारे के बावजूद इनकी संख्या में कमी की बजाय बढ़ोतरी ही हो रही है। ऐसे में जिला न्यायालय के एक कक्ष में कुटुम्ब न्यायालय के केसों की सुनवाई में कई तरह की समस्याएं स्टॉफ को भी आ रही थी और महिला पक्षकारों को अपने बच्चों के साथ सुविधाघर और वेटिंग ऐरिया की कमी भी खल रही थी। इन सब सुविधाओं का यहां ध्यान रखा गया है।
जिले में पारिवारिक विवादों का आंकड़ा एक हजार के आसपास
बता दें कि करीब 900 के आसपास कुटुम्ब न्यायालय में मामलों की सुनवाई की जा रही है। जल्दी ही ये आंकड़ा एक हजार को पार करेगा। प्रधान न्यायाधीश की पक्षकारों को सलाह है कि आपसी सुलह कर अपने परिवारों में खुशहाल जीवन यापन करें, क्योंकि इस तरह के विवादों में सबसे ज्यादा नुकसान उन बच्चों का होता है जिनकी इसमें कोई गलती नहीं होती है। बच्चों के पालन-पोषण के लिए पिता का प्यार और मां का दुलार दोनों ही जरुरी होता है।
4 परामर्शदाता देते है सेवाएं
गौरतलब है कि कुटुम्ब न्यायालय में आने वाले सभी मामलों में यह भरसक प्रयास किया जाता है कि पहले दोनों पक्षों के बीच सुलह कराकर, उनकी गलतफहमियां दूर कर उनका घर फिर से बसा दिया जाए। इसके लिए न्यायालय में 4 परामर्शदाता सेवाएं देते है। जिनमें महेंद्र जैन, संदीप शर्मा, निखत अफरोज और अलमास खान शामिल है।

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Author: Kpn 24

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