
KPN24:- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बुरहानपुर जिले के दर्यापुर और एकझिरा गांव की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने एक प्रेरणादायक और अनूठी मिसाल पेश की है। इन महिलाओं ने केले के रेशे से ईको फ्रेंडली राखियों का निर्माण कर न केवल पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है, बल्कि देशभक्ति और आत्मनिर्भरता का संदेश भी पूरे देश को दिया है।
खास बात यह है कि ये राखियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और देश की रक्षा में तैनात वीर सैनिकों को भेजी जाएंगी।
महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल
दर्यापुर के ख्वाजा गरीब नवाज स्व सहायता समूह की सदस्य नफिशा तड़वी और एकझिरा गांव के लवकुश स्व सहायता समूह की अनुसुइया चौहान ने बताया कि यह पहल पूरी तरह से स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर शुरू की गई है।
“जब हमारे द्वारा बनाई गई राखियां देश के माननीय नेताओं और सैनिकों की कलाई पर बंधेंगी, तो यह पूरे बुरहानपुर जिले के लिए गर्व का क्षण होगा,” — अनुसुइया चौहान, सदस्य, लवकुश स्व सहायता समूह।
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार सृजन
इस कार्य में कई स्व सहायता समूह की महिलाओं ने हिस्सा लिया है, जिन्होंने केले के रेशों को संसाधित कर सुंदर और आकर्षक राखियों का निर्माण किया है। यह पहल न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की कला, मेहनत और नवाचार को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रही है।
‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

इस नवाचार से बुरहानपुर की महिलाओं को न केवल नई पहचान मिल रही है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत यह प्रयास प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती प्रदान कर रहा है।
यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है, जहां परंपरा, पर्यावरण और आर्थिक सशक्तिकरण का संगम देखने को मिलता है।
केले की कलाकारी से बनी बुरहानपुर की राखियां अब देश के नेताओं और सैनिकों की कलाई पर सजेंगी।
यह सिर्फ राखी नहीं, एक संदेश है — स्वाभिमान, सशक्तिकरण और संवेदनशीलता का।










