
KPN24:- आज़ादी के 78 साल बाद बस्तर ने इतिहास रच दिया। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 29 गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। दशकों तक जहां नक्सलियों का लाल झंडा खौफ और ताक़त का प्रतीक रहा, वहाँ आज तिरंगे की शान ने नई उम्मीद जगाई।
सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के धैर्य का परिणाम
इन इलाकों में तिरंगे का फहराया जाना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की ऐतिहासिक तस्वीर है। यह तस्वीर सुरक्षा बलों के साहस, सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और ग्रामीणों की उम्मीदों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा,
“बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर प्रगति, समृद्धि और विश्वास की ओर बढ़ रहा है। सरकार का संकल्प है कि हर गांव तक विकास की रोशनी पहुँचे और कोई भी नागरिक उससे अछूता न रहे।”
“लाल झंडे के खौफ से तिरंगे की शान तक”
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा,
“आज जिन गांवों में तिरंगा फहराया गया, वहाँ दशकों तक लाल झंडे का डर छाया रहा। यह बस्तर में नई सुबह और शांति की शुरुआत का प्रतीक है।”
बीजापुर जिले के कोंडापल्ली, जीड़पल्ली, वाटेवागु, कर्रेगुट्टा, पिड़िया और भीमारम;
नारायणपुर जिले के गारपा, कच्चापाल, कांदूलनार और रायनार;
सुकमा जिले के गोमगुड़ा, गोल्लाकुंडा और नुलकातोंग जैसे गांव इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
विकास ही स्थायी समाधान
पिछले वर्षों में सुरक्षा बलों की नई रणनीति और आत्मसमर्पण नीति से नक्सली कैडर कमजोर हुआ है। बड़ी संख्या में उग्रवादी मुख्यधारा में लौटे हैं।
सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार, प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा जैसी योजनाओं से ग्रामीणों का विश्वास मजबूत हुआ है।
बदलते बस्तर की तस्वीर
बस्तर की यह नई पहचान पूरे देश को यह संदेश देती है कि इच्छाशक्ति, रणनीति और जनता की भागीदारी से कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती।
कर्रेगुट्टा समेत इन 29 गांवों में शान से लहराता तिरंगा अब शांति, विकास और आत्मविश्वास से भरे भविष्य का प्रतीक है।










