
KPN24 :- रायपुर जिला प्रशासन ने आम जनता को शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ घर-घर पहुंचाने के लिए “सुशासन एक्सप्रेस” नाम से एक अभिनव पहल की है। यह पहल अब जनसमस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी मॉडल बन चुकी है। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री ने 29 मई को ग्राम भैंसा में आयोजित समाधान शिविर के दौरान किया था। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस पहल से हजारों ग्रामीणों को दो दर्जन से अधिक सेवाएं अब गांव के पास ही उपलब्ध हो रही हैं।
ग्रामीणों ने जताया आभार
ग्राम पंचायत संकरी के उत्तम साहू को घर बैठे ही लर्निंग लाइसेंस मिलना खुशी का पल रहा। पहले उन्हें इस काम के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता था, लेकिन सुशासन एक्सप्रेस की वजह से प्रक्रिया आसान हो गई। इसी तरह सांकरा के श्री राजेश यादव ने बताया कि अब उन्हें राशन कार्ड बनाने के लिए पंचायत कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़े। ग्रामीणों ने कहा कि अब शासन की सुविधाएं सीधे गांव में मिल रही हैं।
67 हजार से अधिक आवेदनों का निपटारा
सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से अब तक 75,864 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 67,788 का त्वरित निराकरण हो चुका है। इसमें आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आयुष्मान भारत कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, किसान क्रेडिट कार्ड, नरेगा जॉब कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, श्रम कार्ड, आधार कार्ड, किसान किताब, पेंशन और एचएसआरपी सहित कई सेवाएं शामिल हैं।
गांव में ही लग रहा ‘वन-स्टॉप कैंप’
किसी भी गांव में सुशासन एक्सप्रेस पहुंचने से तीन दिन पहले सूचना जारी की जाती है। मौके पर पटवारी, पंचायत सचिव, स्वास्थ्यकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और विभिन्न विभागों का स्टाफ मौजूद रहता है। इस तरह गांव में ही एक वन-स्टॉप शिविर तैयार हो जाता है।
प्रथम चरण सफल, अब दूसरे चरण की शुरुआत
सुशासन एक्सप्रेस का पहला चरण अभनपुर, आरंग, धरसींवा और तिल्दा विकासखंड के 300 से अधिक ग्राम पंचायतों और आरंग नगर पंचायत के 17 वार्डों में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अब दूसरा चरण शुरू हो चुका है, जिसमें अभनपुर, धरसींवा और तिल्दा विकासखंड के ग्रामीण इलाके शामिल हैं।
कम खर्च में बड़ा बदलाव
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि इस पहल के लिए जिला प्रशासन ने कंडम पड़ी चार एंबुलेंस की मरम्मत कर उन्हें सुशासन एक्सप्रेस रथ में परिवर्तित किया। नाम मात्र खर्च में तैयार किए गए ये मोबाइल वैन अब गांव-गांव पहुंचकर शासन की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचा रहे हैं।










