
KPN24:- छत्तीसगढ़ राज्य शासन की संवेदनशील पहल और मानवीय प्रशासन की भावना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि छत्तीसगढ़ सरकार न केवल विकास की दिशा में अग्रसर है, बल्कि दुःख की घड़ी में भी अपने नागरिकों के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जारी “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025” के अंतर्गत, ग्राम बोरसी, थाना पामगढ़ निवासी श्रीमती धर्मीन नायक को उनके पति स्व. जोहन नायक की नक्सली घटना में हुई मृत्यु के बाद शासन द्वारा अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है। यह कदम शासन की संवेदनशीलता, न्यायप्रियता और मानवता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
इसी क्रम में स्वर्गीय राजेन्द्र भारद्वाज, जो बम्हनीडीह के अनुसूचित जाति बालक छात्रावास में अधीक्षक पद पर कार्यरत थे, के निधन के पश्चात उनकी पत्नी श्रीमती जानकी बाई भारद्वाज को भी अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। उन्हें जिला कार्यालय जांजगीर-चांपा में भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर पदस्थ किया गया है।
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने दोनों महिलाओं को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए कहा कि—
> “राज्य शासन का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा और आत्मसम्मान से जोड़ना है। यह नियुक्तियाँ शासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतीक हैं।”
यह निर्णय न केवल शासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि देश और समाज के प्रति समर्पण व्यर्थ नहीं जाता — हर बलिदान, हर पीड़ा का सम्मान राज्य अवश्य करता है।
यह पहल उन सभी के लिए प्रेरणा है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हौसला नहीं खोया और नई सुबह की ओर कदम बढ़ाए।










