
KPN24:- छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान को लेकर आज एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। कुल 210 नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर को “छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक क्षण” बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। आज बस्तर में 210 नक्सली, जो कभी माओवाद के झूठ में उलझकर वर्षों तक अंधेरी राहों पर भटकते रहे, उन्होंने संविधान और हमारी नीतियों पर विश्वास जताते हुए विकास की मुख्यधारा को अपनाया है। उन्होंने अपने कंधों से बंदूक उतारकर, अपने हाथों में संविधान को थामा है।”
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से उनकी मुलाकात उनके जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोष देने वाले क्षणों में से एक रही। उन्होंने कहा कि सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी योजनाएँ नक्सल प्रभावित युवाओं को नई दिशा दे रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “इन नीतियों की ताकत और विश्वास का परिणाम है कि आज नक्सली हमारी सरकार की विकास प्रतिज्ञा को स्वीकार कर रहे हैं और आत्मसमर्पण की राह चुन रहे हैं। बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, और आज का दृश्य इसका साक्षी है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह केवल सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण भविष्य की नींव है। सरकार आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “डबल इंजन सरकार की प्रतिज्ञा है — छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त करना। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में यह प्रतिज्ञा साकार होती जा रही है।”
अंत में उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा —
“जय हिंद! जय छत्तीसगढ़!”










