
KPN24:- जांजगर-चांपा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई ने हड़कंप मचा दिया है। एसडीएम कार्यालय चांपा के भू अर्जन शाखा के अमीन पटवारी बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार देवांगन को एक किसान से ₹1,80,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
एसीबी बिलासपुर इकाई द्वारा यह कार्रवाई आज दोपहर की गई, जब आरोपी किसानों से भू-अर्जन मुआवजा राशि जारी करने के एवज में घूस मांग रहे थे। कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपी पकड़े गए और रिश्वत की पूरी रकम उनके कब्जे से बरामद की गई।
शिकायत से गिरफ्तारी तक की कहानी
ग्राम रायपुरा, जिला सक्ती निवासी बुधराम धीवर ने 16 अक्टूबर 2025 को एसीबी इकाई बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि ग्राम कोसमंदा (जांजगीर) स्थित उनकी और उनकी बहन की जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण हेतु अधिगृहित की गई थी। मुआवजा राशि ₹35,64,099 उन्हें अगस्त 2025 में एसडीएम कार्यालय चांपा से भुगतान की गई थी।
राशि भुगतान के बाद अमीन पटवारी बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार देवांगन ने किसान से कहा कि उन्होंने मुआवजा निकालवाने में मदद की है, जिसके एवज में ₹1.80 लाख देने होंगे। किसान ने रिश्वत देने से इनकार कर एसीबी से संपर्क किया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़वाने की योजना बनी।
एसीबी की सटीक और तेज कार्रवाई
आज, 30 अक्टूबर 2025 को एसीबी टीम ने डीएसपी एसीबी बिलासपुर के नेतृत्व में जाल बिछाया। जैसे ही किसान ने तय रकम आरोपी बिहारी सिंह को सौंपी, टीम ने मौके पर दबिश दी और दोनों आरोपी — अमीन पटवारी बिहारी सिंह एवं ऑपरेटर राजकुमार देवांगन — को रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।
घटनास्थल से रिश्वत की पूरी राशि ₹1,80,000 जप्त कर ली गई है। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
भ्रष्टाचार पर एसीबी की सख्ती जारी
एसीबी सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई पिछले 1.5 वर्षों में एसीबी बिलासपुर इकाई की 36वीं सफल ट्रैप कार्रवाई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और रिश्वतखोर अफसर-कर्मचारियों पर नकेल कसने की यह मुहिम और भी तेज की जाएगी।
स्थानीय प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप
एसडीएम कार्यालय चांपा में हुई इस कार्यवाही से अधिकारी-कर्मचारियों में खलबली मच गई है। आम जनता में भी एसीबी की इस सख्ती की सराहना की जा रही है और लोगों का कहना है कि ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई से ही व्यवस्था में पारदर्शिता आ सकती है।










