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बाग बनी रहे तो फूल फिर खिलेंगे और जिंदगी बनी रहे तो हम फिर मिलेंगे – स्वामी मधुसूदनाचार्य

KPN24:- जांजगीर-चांपा जिले में धर्म और आध्यात्म की पवित्र स्थली शिवरीनारायण में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव, ज्ञान यज्ञ एवं संत सम्मेलन इस वर्ष भी परंपरागत उत्साह, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। मठ मंदिर महोत्सव तथा श्री सीताराम विवाह उत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने बाराती बनकर हिस्सा लिया और धार्मिक धूमधाम के साथ इसे यादगार बनाया।

इस दिव्य आयोजन में अयोध्या धाम के कथा व्यास आचार्य मधुसूदनाचार्य, शिवरीनारायण मठ के मठाधीश राजेश्री महंत महाराज, पुजारी त्यागी महाराज, मुख्तियार सुखराम दास एवं बड़ी संख्या में साधु-संत एवं भक्तगण उपस्थित रहे।

कथा व्यास मधुसूदनाचार्य ने प्रवचन देते हुए कहा कि “शिवरीनारायण पवित्र धाम है जहाँ भगवान जगन्नाथ जी शबरी नारायण साक्षात विराजमान हैं। मिथिला की माता सीता और छत्तीसगढ़ के राम का यह अलौकिक विवाह उत्सव भक्तों के लिए दुर्लभ संयोग है। यहाँ शामिल प्रत्येक भक्त अत्यंत सौभाग्यशाली है।”

नगरवासियों द्वारा भगवान श्री सीताराम की भव्य बारात का स्वागत अद्वितीय उत्साह के साथ किया गया। नगर में जगह–जगह आरती, पुष्पवर्षा, आतिशबाजी, जलपान और मिष्ठान की भव्य व्यवस्था स्थानीय नागरिकों एवं व्यापारियों द्वारा की गई। संध्या बेला में अयोध्या के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत वैवाहिक संगीत एवं पारंपरिक गीतों ने पूरे वातावरण को भक्ति और आनंद से भर दिया।

अपने उद्बोधन में स्वामी मधुसूदनाचार्य की पंक्तियाँ–

“बाग बनी रहे तो फूल फिर खिलेंगे और जिंदगी बनी रहे तो हम फिर मिलेंगे,
हम विदा हो चले तो याद सबको आएगी,
लगता है ऐ ज़मीं ऐ आसमां हमें दुबारा जरूर लाएगी।”

सुनकर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

श्री सीताराम विवाह उत्सव में सभी श्रद्धालु नाचते-गाते झूमते रहे और नगर “सीताराम जय-जय राम” के उद्घोष से गूँज उठा। पूरे क्षेत्र में विशेष आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का माहौल रहा।

आयोजन में मठ मंदिर के न्यासी गण, साधु-संत, साध्वी और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की और आयोजन को ऐतिहासिक एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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Author: Kpn 24

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